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सीख: छोटी बातों को अहमियत देने से जिंदगी भी छोटी लगने लगती है
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 11 Jun 2018 03:06 PM IST
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एक मैनेजर, जिसने कंपनी की दो सहेलियों की गलतफहमी दूर करते हुए दूरदर्शिता का परिचय दिया।
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प्रियंका और शब्दा सहेलियां थीं। एक साथ पढ़ाई पूरी करने के बाद वे एक ही कंपनी में काम भी करने लगीं। पर एक दिन उनकी जिंदगी में ऐसा तूफान आया, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। किसी ने उनके बीच गलतफहमी की ऐसी दीवार खड़ी कर दी कि उन दोनों ने एक दूसरे से बात किए बगैर खुद को अलग कर लिया। वे रोज आमने-सामने होती थीं, फिर भी वे बात नहीं करती थीं।
दोनों मन ही मन बहुत दुखी थीं, क्योंकि वे एक दूसरे को बहुत चाहती थीं। एक दिन मैनेजर ने उन दोनों को केबिन में बुलाया और समझाने की कोशिश की। पर दोनों टस से मस नहीं हुईं। अगले दिन मैनेजर ने दोनों को अलग-अलग टीमों में बांट दिया। अब तक उन दोनों के काम से उनकी टीम बहुत खुश थी। पर नई टीमों में बंटने से उनके काम पर फर्क पड़ने लगा और टीम का प्रदर्शन बदतर होने लगा। प्रियंका और शब्दा पर उंगलियां उठने लगीं। दोनों को कंपनी से निकालने की बातें शुरू हो गईं।
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मैनेजर ने आखिरी बार दोनों को बुलाया और कहा, मैं तुम्हें और नहीं समझाऊंगा, क्योंकि मैं खुद यह नौकरी छोड़ रहा हूं। दोनों हैरान रह गईं। मैनेजर बोला, असल में मैंने कल एक कलम बाजार से खरीदी थी। मैं अपना सारा काम कलम से करता हूं। लेकिन वह कलम खराब हो गई। इसलिए मैं नौकरी छोड़ रहा हूं। प्रियंका और शब्दा कुछ बोलें, इससे पहले मैनेजर फिर बोले, अजीब है न।
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पर यही काम तो आप लोग भी कर रहे हैं। यह आपको तय करना है कि जिस वजह से आपके बीच लड़ाई हुई, वह कारण ज्यादा बड़ा है या आपका रिश्ता, आपका काम और आपका परिवार ज्यादा बड़ा है। क्या कोई गलतफहमी इतनी बड़ी हो सकती है कि वह आपकी जिंदगी बदल दे? अब फैसला करना आपके हाथ में है।