सोने की इस कला के हैं चौंकाने वाले फायदे
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जब शरीर थक जाता है तो नींद आने लगती है और आप सोना चाहते हैं। यह एक स्वभाविक क्रिया है जो मनुष्य में ही नहीं दूसरे जीवों में भी होती है। लेकिन सभी जीवों के सोने का एक अलग तरीका होता है।
मनुष्यों के सोना का भी एक खास तरीका है जिसका ध्यान रखते हुए अगर शयन किया जाए तो मानसिक विकास एवं स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
लेकिन आमतौर पर लोग इन बातों का ध्यान नहीं रखते। यही कारण है कि सोकर उठने के बाद भी ऐसा लगता है कि शरीर थका हुआ है। अपने अंदर उर्जा की कमी महूसस होती है और मानसिक तनाव बना रहता है।
लेकिन अगर आप सोने की कला को जान लेंगे तो कम समय में ही बेहतर नींद लें पाएंगे आपको भौतिक एवं अध्यात्मिक लाभ मिल पाएगा।
यह नींद आत्म विकास में बाधक है
सोने की कला नहीं जानने के कारण कुछ व्यक्ति अतिनिद्रा के तो कुछ अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं। सोने से पूर्व व्यक्ति अपने मन को पवित्र विचारों से प्रभावित करे, आवेग और आवेश के कीटाणुओं को अलविदा कहकर सोए।
पवित्र, सात्विक विचारों को मन आंगन में क्रीड़ा करने दें ताकि गहरी नींद भी आ सके। जिस भावना के साथ व्यक्ति सोता है नींद में भी उसका प्रभाव बना रह सकता है।
सोते समय योग निद्रा में स्थित हो शरीर के प्रत्येक अवयव कोशिका पर ओम् अर्हं या इष्ट मंत्र का न्यास भी किया जा सकता है। नींद का संबंध हमारे भीतरी संस्कारों के साथ है।
अनिद्रा की बीमारी की पृष्ठभूमि भी कर्म ही है पर वह असातवेदनीय से संबद्ध है। एक प्रकार की नींद होती है, जिसे मूर्छा की नींद कहते हैं। इस नींद के अधीन बना व्यक्ति जागता हुआ भी सोता है। यह नींद आत्म विकास में बाधक है। जो धार्मिक है, विषय भोगों से विरत है सत्प्रवृत्ति में रत है, वह सोता हुआ भी जागता है।