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सुख-शांति की शर्तिया गारंटी हैं ये नुस्खे
इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 15 Oct 2012 01:24 PM IST
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आप इन सूत्रों को चाहें तो टोना-टोटकानुमा नुस्खे कह सकते हैं लेकिन एस्ट्रो साइंस सेंटर चेन्नई ने इन्हें अपनाने पर सुख-शांति की शर्तिया गांरटी करार दिया है।
करीब तीन हजार लोगों की दिनचर्या में शामिल आदतों और क्रियाओं का अध्ययन करने के बाद सेंटर के निदेशक डा. ए.नरसिंहन ने कहा है कि प्रयोग के तौर पर भी इन नुस्खों को अपनाया जा सकता है।
शुरु करते समय लग सकता है कि ये बेकार हैं लेकिन ये बहुत सी क्रियाएं ऐसी होती हैं जो मनुष्य बिना सोचे समझे भी करता है। अगर थोड़ी सी सजगता बरती जाए तो क्या हर्ज है? सेंटर ने जिन क्रियाओं को रोजमर्रा जीवन में शामिल करने की सलाह दी है उनमें कुछ इस प्रकार हैं।
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सूर्योदय के पहले उठें
बिस्तर से उठते समय दोनों पैर जमीन पर एक साथ रखे, उसी समय इष्ट का स्मरण करे और हाथों को मुख पर फेरे। जहां तक हो सके सूर्योदय के पहले उठे और उगते सूर्य के दर्शन करें। उस समय कुछ देर के लिए- कम से कम दो मिनट तक त्राटक करे।
सेवा करें और उपहार दें
घर में तुलसी और आक का पौधा लगाए। उनकी नियमित सेवा करे। पक्षियों को दाना डाले। स्नान करने के बाद स्नानघर को कभी गंदा न छोड़े। जितना हो सके भांजी और भतीजी को कोई न कोई उपहार देते रहे। बुधवार को किसी को भी उधार न दें।
पूजा-पाठ करें और दान दें
वर्ष में कम से कम दो बार घर में किसी पाठ या मंत्रोक्त पूजन जरूर कराए। जहाँ तक हो सके अन्न, वस्त्र, तेल, कंबल, अध्ययन सामग्री आदि का दान करें। दान करने के बाद उसका उल्लेख न करें। अपनी राशि या लग्न के स्वामी ग्रह के रंग की कोई वस्तु अपने साथ हमेशा रखे।
उपासना करें, मंदिर जाएँ
सुबह-शाम उपासना करें। या सप्ताह में किसी दिन, बेहतर हो कि अपने जन्मवार पर मंदिर या पूजा स्थल जाएं। डा. नरसिंहन का कहना है कि ये सूत्र तो लोगों की जीवनशैली का अध्ययन करने के बाद सामने आए हैं। कोशिश की जाए तो उन लोगों के लिए भी सूत्र तय किए जा सकते हैं जो आध्यात्मिकता से परहेज करते हैं।
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करीब तीन हजार लोगों की दिनचर्या में शामिल आदतों और क्रियाओं का अध्ययन करने के बाद सेंटर के निदेशक डा. ए.नरसिंहन ने कहा है कि प्रयोग के तौर पर भी इन नुस्खों को अपनाया जा सकता है।
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शुरु करते समय लग सकता है कि ये बेकार हैं लेकिन ये बहुत सी क्रियाएं ऐसी होती हैं जो मनुष्य बिना सोचे समझे भी करता है। अगर थोड़ी सी सजगता बरती जाए तो क्या हर्ज है? सेंटर ने जिन क्रियाओं को रोजमर्रा जीवन में शामिल करने की सलाह दी है उनमें कुछ इस प्रकार हैं।
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सूर्योदय के पहले उठें
बिस्तर से उठते समय दोनों पैर जमीन पर एक साथ रखे, उसी समय इष्ट का स्मरण करे और हाथों को मुख पर फेरे। जहां तक हो सके सूर्योदय के पहले उठे और उगते सूर्य के दर्शन करें। उस समय कुछ देर के लिए- कम से कम दो मिनट तक त्राटक करे।
सेवा करें और उपहार दें
घर में तुलसी और आक का पौधा लगाए। उनकी नियमित सेवा करे। पक्षियों को दाना डाले। स्नान करने के बाद स्नानघर को कभी गंदा न छोड़े। जितना हो सके भांजी और भतीजी को कोई न कोई उपहार देते रहे। बुधवार को किसी को भी उधार न दें।
पूजा-पाठ करें और दान दें
वर्ष में कम से कम दो बार घर में किसी पाठ या मंत्रोक्त पूजन जरूर कराए। जहाँ तक हो सके अन्न, वस्त्र, तेल, कंबल, अध्ययन सामग्री आदि का दान करें। दान करने के बाद उसका उल्लेख न करें। अपनी राशि या लग्न के स्वामी ग्रह के रंग की कोई वस्तु अपने साथ हमेशा रखे।
उपासना करें, मंदिर जाएँ
सुबह-शाम उपासना करें। या सप्ताह में किसी दिन, बेहतर हो कि अपने जन्मवार पर मंदिर या पूजा स्थल जाएं। डा. नरसिंहन का कहना है कि ये सूत्र तो लोगों की जीवनशैली का अध्ययन करने के बाद सामने आए हैं। कोशिश की जाए तो उन लोगों के लिए भी सूत्र तय किए जा सकते हैं जो आध्यात्मिकता से परहेज करते हैं।