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सीख: अपेक्षाएं ही बनती है निराशा का कारण
Tue, 24 Sep 2019 11:47 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 24 Sep 2019 11:47 AM IST
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कोई व्यक्ति किसी से नफरत करता है तो उसके पीछे क्रोध या अहंकार की भावना शामिल होता है। एक हाथ से कभी भी ताली नहीं बजाई जा सकती है। नफरत के लिए आपका व्यवहार जिम्मेदार होता है। क्रोध में अक्सर इंसान यह भूल जाता हैं कि वो किस आवाज में सामने वाले से बात कर रहे हैं। हो सकता है आपने कभी अपने परिवार को दुख या कष्ट पहुंचाया हो। लेकिन जिस व्यक्ति ने भी उस क्रोध को सहा होगा वह कभी भी उस घटना को नहीं भूल पाता है।
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क्रोध में कह गए शब्दों को भुलाना आसान नहीं होता है। जिन लोगों से आप प्रेम करते है, जिनके साथ रहने से आपको ख़ुशी मिलती है, अक्सर उन्हीं पर हम गुस्सा भी करते है। ऐसे में हो सकता है आपके परिवार वाले आपको उसी व्यवहार की वजह से माफ ना कर पा रहे हों। हम जिनके साथ संबंधों में होते हैं, उनसे हमारी अपेक्षाएं भी अधिक होती है। अपेक्षाओं के इसी अधिकता की वजह से हम निराशा के साये में खो जाते है।
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जिस प्रेम और सम्मान की आपको आवश्यकता है उसे पहले देना सीखिए। खुद से सवाल करें कि आपको अपने परिवार से कैसे बात करनी चाहिए। उनसे जानें कि उन्हें क्या चाहिए, उन्हें क्या परेशानी है।
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