फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   holika dahan in sprituality

इसलिए होलिका आग में जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित रह गया

Thu, 05 Mar 2015 06:06 PM IST
योगी अश्विनी
योगी अश्विनी Updated Thu, 05 Mar 2015 06:06 PM IST
विज्ञापन
holika dahan in sprituality

फाल्गुन पूर्णिमा की रात हिरण्यकश्यप ने कुछ ऐसा सोचा था कि प्रह्लाद को होलिका की गोद में जलाकर मार दें। किन्तु उस रात कुछ शक्ति सक्रिय थी कि प्रह्लाद बिना जले आग से बाहर आ गया और होलिका जल गई और प्रह्लाद का बाल भी बांका न हुआ। इस कहानी में संकेत है कि दिव्य शक्ति हमारे आसपास ही मौजूद है।

विज्ञापन


एक साधक जब निर्धारित विभिन्न क्रियाएं या साधना करता है तो उनके समीप पहुंच जाता है। सृष्टि पाँच तत्वों के विभिन्न संयोजनों से बनी हैं। इन पांच तत्वों में, अग्नि विशेष महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल इसी तत्व को दूषित या मलिन नहीं किया जा सकता। केवल यही तत्व है जो गुरूत्वाकर्षण के बावजूद ऊपर की ओर उठता है। कोई आश्चर्य नहीं कि यह पहले वेद, ऋग्वेद का पहला शब्द बन गया।
विज्ञापन

 
कुछ विशेष दिन, अग्नि की शक्ति को प्राप्त करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। होली का दिन भी उन में से एक है। होलिका एक साधिका थी और अग्नि द्वारा उसके विशुद्ध (पवित्र) होने का समय आ चुका था इसलिए वरदान होते हुए भी अग्नि ने उसे स्वीकार कर लिया था। और प्रह्लाद जो पहले से ही पवित्र और विशुद्ध था इसलिए जला नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed