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Holika Dahan 2021: जानिए क्यों की जाती है होली से पूर्व अग्नि की पूजा?
Wed, 24 Mar 2021 08:15 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन, वास्तुविद
अनीता जैन, वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 24 Mar 2021 08:15 AM IST
सार
- नारद पुराण के अनुसार अग्नि प्रज्ज्वलन फाल्गुन पूर्णिमा को भद्रारहित प्रदोषकाल में सर्वोत्तम माना गया है।
- 28 मार्च को होलिका दहन होगा और सोमवार, 29 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी।
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होलिका दहन 2021:
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
रंग, प्रेम ,भाईचारा और सदभाव का त्योहार होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। इस साल 28 मार्च को होलिका दहन होगा और सोमवार, 29 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी।
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सुख-समृद्धि के लिए अग्नि पूजा
होलिका दहन से पूर्व अग्निदेव की पूजा का विधान है। अग्निदेव पंचतत्वों में प्रमुख माने जाते हैं जो सभी जीवात्माओं के शरीर में अग्नितत्व के रूप में विराजमान रहते हुए जीवन भर उनकी रक्षा करते हैं। अग्निदेव सभी जीवों के साथ एक समान न्याय करते हैं। इसलिए सनातन धर्म को मानने वाले सभी लोग भक्त प्रहलाद पर आए संकट को टालने और अग्निदेव द्वारा ताप के बदले उन्हें शीतलता देने की प्रार्थना करते हैं। हमारे सभी धर्मग्रंथों में होलिका दहन में मुहूर्त का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है।
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नारद पुराण के अनुसार अग्नि प्रज्ज्वलन फाल्गुन पूर्णिमा को भद्रारहित प्रदोषकाल में सर्वोत्तम माना गया है। होलिका दहन के समय परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ नया अन्न यानि गेहूं, जौ एवं चने की हरी बालियों को लेकर पवित्र अग्नि में समर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से घर में शुभता का आगमन होता है। धर्मरूपी होली की अग्नि को अतिपवित्र माना गया है इसलिए लोग इस अग्नि को अपने घर लाकर चूल्हा जलाते हैं। और कहीं-कहीं तो इस अग्नि से अखंड दीप जलाने की भी परंपरा है।माना जाता है कि इससे न केवल कष्ट दूर होते है,सुख-समृद्धि भी आती है।
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क्या कहता है विज्ञान
होली के त्योहार से शिशिर ऋतु की समाप्ति तथा वसंत ऋतु का आगमन होता है। आयुर्वेद के अनुसार दो ऋतुओं के संक्रमण काल में मानव शरीर रोग और बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। इस ऋतु में शरीर में कफ की मात्रा बढ़ जाती है और वसंत ऋतु में तापमान बढ़ने पर कफ के शरीर से बाहर निकलने की प्रक्रिया में कफदोष पैदा होता है, जिसके कारण सर्दी, खांसी,सांस की बीमारियाँ साथ ही गंभीर रोग जैसे खसरा, चेचक आदि होते है। मध्यम तापमान होने के कारण यह मौसम शरीर में आलस्य भी पैदा करता है। इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से होलिका दहन के विधानों में आग जलाना,अग्नि परिक्रमा,नाचना, गाना आदि शामिल किए गए है। अग्नि की ताप जहां रोगाणुओं को नष्ट करती है,वहीं खेल-कूद की अन्य गतिविधियां शरीर में जड़ता नहीं आने देती इससे कफदोष दूर हो जाता है, शरीर की ऊर्जा और स्फूर्ति कायम रहती है एवं शरीर स्वस्थ्य रहता है।