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हनुमान जी के जन्मदिन पर जानिए हनुमान जी की यह खास बातें

रामेश्वर शरण Updated Sat, 04 Apr 2015 03:34 PM IST
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शक्ति के प्रतीक हनुमान मन से भी अपार बलशाली हैं। उन्होंने वासना को जीता। वह बुद्धिमान हैं। उनका शक्ति, व्रत, तप प्रधान जीवन सभी प्रकार से श्रेष्ठ है। शरीर और मन पर उनका पूरा-पूरा अधिकार है। हृदय से वे निर्मल हैं तो राम के परम भक्त भी।
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शरीर, मन और समाज में शक्ति का क्या उद्देश्य है? हनुमान के जीवन से सहज ही इन प्रश्नों का उत्तर मिल जाता है। शक्ति साधनों का उपयोग किस लिए? राम-सेवा के लिए। रामदूत बनने में ही हनुमानजी अपना गौरव समझते हैं। राम की आराधना का तात्पर्य आसुरी शक्तियों का उन्मूलन भी है।


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शक्तियों का उपयोग दूसरों का शोषण, अपहरण करने में करना, समाज के लिए आतंक, अत्याचार, असुरता की भावना पैदा करना रावण का मार्ग है। शक्ति तो हनुमान की तरह राम के पीछे चल कर ही पुण्यवान हो पाती है। जो निर्बल  कमजोर हैं, उन्हें अपनी शक्ति का सहारा देकर बलवान बनाना, सहज अधिकार दिलाना बलवान का धर्म है। एक मां अपने नन्हें शिशु को अपनी शक्तियों से पाल-पोस कर एक दिन सामर्थ्यवान बना देती है।

स्मरण रहे शक्तियों का महत्व बनाने में है-निर्माण में है, नष्ट करने में नहीं। समाज को कमजोर बनाने के लिए शक्तियां नहीं हैं। इससे शक्ति वान का पतन होता हैं। हनुमान के नाम भी उनके स्वरूप और विशिष्टताओं को परिभाषित करती है। हनुमान भारतीय धर्म परंपरा में भक्ति के सबसे लोकप्रिय स्वरूप और रामायण के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं।

उन्हें शिव का ग्यारहवां रुद्रावतार भी माना जाता है। उनकी सबसे प्रसिद्ध उपलब्धि थी, वानरों की सेना के अग्रणी के रूप में  रावण से लड़ाई। कुछ विद्वानो ने हनुमान की जाति ही वानर बताई गई है, उनके अनुसार मूलरूप में तो वे मनुष्य रूप धारी ही है। विराट नगर (राजस्थान) में स्थापित पंचखंडपीठ पावन धाम स्थित वज्रांग मंदिर हनुमान के इस रूप को मानने वालों का तीर्थ है।

गोभक्त महात्मा रामचन्द्र वीर ने ऐसे मंदिरों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया, जिसमे हनुमान जी की बिना बंदर वाले मुख की मूर्ति स्थापित हो। महात्मा रामचन्द्र वीर ने हनुमान जी की जाति वानर बताई है, शरीर नहीं। उन्होंने लंका को जलाने के लिए वानर का रूप धरा था।

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