{"_id":"a399affb75c7aaa581d0fb955f340917","slug":"guru-maa-anandmurti-pravachan-on-dharma-hindi-rj","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवरात्र में जान लीजिए धर्म का सही मतलब क्या होता है?","category":{"title":"Wellness","title_hn":"पॉज़िटिव लाइफ़","slug":"wellness"}}
नवरात्र में जान लीजिए धर्म का सही मतलब क्या होता है?
गुरु मां आनंदमूर्ति/अध्यात्मिक गुरू
Updated Tue, 30 Sep 2014 03:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धर्म है मनुष्य का मूलभूत स्वभाव। धर्म का अर्थ कोई विशिष्ट परंपरा, सम्प्रदाय नहीं। इसका संबंध किसी एक विशिष्ट प्रणाली अथवा दर्शनशास्त्रा से कदापि नहीं। धर्म का अर्थ है जो जैसा है उसको खोजना, उसको पहचानना, उसको जानना। इसी को हम धर्मयात्रा कहेंगे।
विज्ञापन
धर्म एक सीढ़ी है जिस पर निरंतर चढ़ते हुए व्यक्ति ऊंचा उठता जाता है। धर्म आस्था नहीं है क्योंकि आस्था कभी भी अनास्था में बदल सकती है। और ईश्वर का स्वरूप व स्वभाव मनुष्य की आस्था और अनास्था से परे है।
विज्ञापन
पढ़ें,साप्ताहिक राशिफलः 29 सितंबर से 5 अक्तूबर तक
विज्ञापन
बहुत से लोग धर्म को विश्वास का नाम भी दे देते हैं। पर धर्म विश्वास भी नहीं हो सकता क्योंकि विश्वास सदैव बदलते रहते हैं। जैसे एक समय तक विश्वास यह था कि पृथ्वी को एक बैल ने अपने एक सींग पर उठाया हुआ है और जब बैल थक कर पृथ्वी को एक सींग से दूसरे सींग पर ले आता है तो भूचाल आ जाता है।
पढ़ें,मां दुर्गा के इन सिद्घ मंत्रों से पूरी होगी हर मनोकामना
एक समय पर यह भी विश्वास था कि धरती चपटी है। आगे मानवीय विकास के साथ जब इस पर शोध किया गया तब निष्कर्ष यह निकला कि धरती चपटी नहीं बल्कि गोल है।
आस्था, विश्वास तो बदलते रहते हैं पर सत्य हम उसी को कहते हैं जो बदलता नहीं। जो सदैव एकरस, समरस रहे, उसी को हम सत्य कहते हैं। और इसी सत्य की खोज को ही धर्म कहते हैं।