कदम-कदम पर बिखरा आश्चर्य, देखिए आपको क्या चकित करता है
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कोई एक ही इस आत्मतत्व को आश्चर्य से देखता है, और वैसे ही दूसरा कोई ही इसे दूसरों को बताता है, जिन्हें बताता है, उनमें भी कोई ही सुनना जानता है, परंतु कोई कोई सुन कर भी इसे नहीं जानता।
आश्चर्य है कि बहुत कम लोग इसे जान पाते हैं। गीता का यह श्लोक (2-29) विचारों को झकझोरने के लिए काफी है। हमारे आसपास करोड़ों-अरबों चमत्कार हो रहे हैं। परंतु हम उनको देखकर भी अनदेखा कर देते हैं। जितनी आपकी बुद्धि अविकसित होगी, उतनी छोटी-सी चीज आपको विस्मित कर देगी। और यदि आपकी बुद्धि बहुत विकसित होगी तो सूक्ष्म से सूक्ष्म चीज़ भी आपको आश्चर्य चकित कर देगी।
कोई व्यक्ति नियाग्रा फॉल, ग्रैंड कैनियन या माऊंट एवरेस्ट को देख कर आश्चर्यचकित हो जाता है। परंतु जिनकी बुद्धि और विकसित हो तो उनको आश्चर्यचकित होने के लिए माऊंट एवरेस्ट जाने की जरूरत नहीं, वे तो पहली बारिश के चमत्कार से ही आश्चर्यचकित हो जाएंगे। और अध्यात्म विद्या में विकसित व्यक्ति को एक अनार के दानों की पैकिंग या एक नारियल की अंदरूनी संरचना ही अत्यधिक आश्चर्यचकित कर देती है।
आश्चर्य में छुपा ईश्वर का रहस्य
कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का कहना है कि एक बच्चे का दुनिया में आना अपने आप में एक बहुत बड़ा चमत्कार है। "गौर से देखिए और अपने आप से पूछिए कि कितना कुछ आसपास हो रहा है जिससे चकित हुआ जा सकता है। परंतु जो नहीं सोचता वह संसार के इतने बड़े आश्चर्य को देख कर भी अहोभाव से नहीं भर सकता है।
शास्त्रों में ज्ञान को ′दर्शन′ के नाम से प्रतिपादित किया है। दर्शन करने वाले को ′दार्शनिक′ कहा जाता है। यह एक अध्यात्म दर्शन की बात है जो आपकी दृष्टि को बदल देगी। यह दर्शन किताबी,दर्शन सांसारिक नहीं है।
यह अनुभूति का दर्शन है। कबीर दासजी से जब पूछा गया कि ये जो बातें आप बोल रहे हो , कहां लिखी हैं? दुनिया में एक नहीं, अनगिनत आश्चर्य हैं। आंख-कान, दिमाग को खुला रखिए आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे कि प्रभु की महिमा कितनी अपरंपार है। फिर आप सबूत नहीं मांगोगे कि प्रभु कहां है।