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Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   every night analyse yourself before sleep

जो सोने से पहले यह काम नहीं करते जीवन में कभी प्रगति नहीं करते

Wed, 03 Dec 2014 03:09 PM IST
श्रीराम शर्मा आचार्य/अध्यात्मिक गुरू
श्रीराम शर्मा आचार्य/अध्यात्मिक गुरू Updated Wed, 03 Dec 2014 03:09 PM IST
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every night analyse yourself before sleep

वैसे लोग कभी प्रगति नहीं करते जो आत्मसमीक्षा नहीं करते। दोष दुर्गुण आत्मसमीक्षा से ही पकड़े जाते हैं। समाधान के बारे में सोचना आत्मसमीक्षा के बाद का काम है। यह बड़ी सावधानी से करने योग्य कार्य है। इसके लिए क्या करना चाहिए?

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दिन व्यतीत हो जाने पर रात्रि को जब बिस्तर पर जाएं तो दिन भर की मानसिक चिन्तन प्रणाली और शारीरिक गतिविधियों की निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए। जहां साधारण मनुष्यों की अपेक्षा असाधारण उत्कृष्ट कर्तव्य का परिचय दिया गया हो वहां अपने आत्मबल पर गर्व और संतोष अनुभव करना चाहिए और जहां चूक हुई तो उसके लिए पश्चाताप प्रायश्चित करते हुए अगले दिन वैसा न करने की अपने आपको कड़ी चेतावनी देनी चाहिए।
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जिस प्रकार व्यापारी अपने बही खाते से यह अनुमान लगाते रहते हैं कि कारोबार नफे में चल रहा है या नुकसान में, ठीक इसी तरह अपनी भावना और क्रिया के जीवन व्यापार की गतिविधियों की समीक्षा करते हुये इस निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए कि हम ऊपर उठ रहे हैं या नीचे गिर रहे हैं।
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यदि उठ रहे हों तो उस उत्कर्ष की गति और भी तीव्र करने का उत्साह पैदा करना चाहिए और यदि पतन बढ़ रहा हो तो उसे रोकने के लिए रुद्र रूप धारण करना चाहिए। गीता में भगवान ने आलंकारिक रूप से जिन कौरवों से लड़ने के लिए कहा था, वस्तुतः वे मनोविकार ही हैं। यह महाभारत हर व्यक्ति के जीवन में लड़ा जाना चाहिए। अपने दोष दुर्गुणों को निरस्त करने के लिए हर व्यक्ति को धनुष बाण संभालकर रखना चाहिए।

भूलों के लिए पश्चाताप प्रार्थना भर पर्याप्त नहीं वरन् उसके लिए प्रायश्चित भी किया जाना चाहिए। छोटी भूलों के लिए छोटे शारीरिक दण्ड दिये जा सकते हैं, भोजन में कटौती, कान पकड़कर बैठक लगाना, कुछ समय खड़े रहना, देर तक जागना, चपत लगाना आदि दण्ड हो सकते हैं।


यदि दूसरों को क्षति पहुँचाई गई है तो उसकी क्षति पूर्ति समाज की भलाई का कोई काम करके करना चाहिए। संसार में जो अंधेर, अविवेक और अनाचार चल रहा है, उसके प्रति आकर्षण नहीं, घृणा होनी चाहिए। उसे अपनाने के लिए नहीं, प्रतिरोध के लिए ही अपनी चेष्टा होनी चाहिए। व्यक्तित्व का निर्माण इसी प्रकार होगा।

(गायत्रीतीर्थ शान्तिकुञ्ज)

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