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दान और परोपकार से घटता नहीं है धन

Wed, 02 Jan 2013 04:06 PM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
राकेश/इंटरनेट डेस्क। Updated Wed, 02 Jan 2013 04:06 PM IST
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charity and help not reduce money

सभी धर्मों में कहा गया है कि दान करो। दान करने से धन घटता नहीं है बल्कि आपका धन बढ़ता है। लेकिन समस्या यह है कि लोग धन बढ़ने का तात्पर्य यह समझते हैं कि आज आप सौ रूपये कमाते हैं तो कल हजार रूपये कमाने लगेंगे। शास्त्रों में मुद्रा को धन कभी कहा ही नहीं गया है। शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति जो पुण्य अर्जित करता है वही धन है।

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पुण्य रूपी धन परोपकार और जनहित से बढ़ता है। मुद्रा रूपी धन तो आपको उतना ही मिलेगा जितना आपकी किस्मत में होगा। अगर आप दान भी कर दें तो आपके पास उतना ही रहेगा जितना आपके भाग्य में है। अगर आप संचित करके भी रखेंगे तब भी उतना ही बचेगा जितना आपकी किस्मत में विधाता ने लिख दिया है।
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दक्षिण भारत की एक कथा है इस संदर्भ में उल्लेखनीय है। एक गरीब ब्राह्मण था। दिन भर अपना काम करता इसके बाद जो भी समय बचता उसे भगवान की सेवा में लगा देता। ब्राह्मण की पत्नी अक्सर ब्राह्मण से कहती पूजा-पाठ से क्या लाभ है भगवान तो हमारी सुनते ही नहीं, पता नहीं हमारी गरीबी कब दूर होगी। एक दिन ब्राह्मणी की बात सुनकर ब्रह्मण बहुत दुःखी था। पूजा करने बैठा तो भगवान प्रकट हो गये।
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भगवान को देखते ही ब्रह्मण अपनी गरीबी दूर करने के लिए प्रार्थना करने लगा। भगवान ने कहा तुमने पूर्व जन्म दान नहीं किया है इसलिए तुम्हारे भाग्य में अन्न धन की मात्रा कम है। अगर तुम चाहो तो तुम्हें तुम्हारे भाग्य का अन्न धन एक साथ मिल सकता है। लेकिन एक बार अन्न धन खत्म होने के बाद तुम क्या करोगे। अच्छा होगा कि तुम धीरे-धीरे अपने हिस्से का अन्न धन प्राप्त करो।

ब्रह्मण ने कुछ देर सोचा फिर बोला प्रभु मेरे भाग्य का सारा अन्न धन एक साथ दे दीजिए। कुछ दिन तो सुखी से जी लूंगा। भगवान ने तथास्तु कह दिया। ब्राह्मण का घर अन्न से भर गया। ब्राह्मणी अन्न का भंडार देखकर खुश हो गयी। ब्राह्मण ने कहा कि इसे हम एक साथ खर्च नहीं करेंगे। हमारा जीवन जैसे चल रहा था हम वैसे ही जिएंगे।


अगले दिन से ब्राह्मण गरीबों को अन्न-धन बांटने लगा। ब्राह्मण की किस्मत में जितना अन्न धन का सुख था वह उसे मिलता रहा। लेकिन दान के प्रभाव से उसके पुण्य में वृद्घि होती गयी और ब्राह्मण का नाम एवं यश चारों ओर फैलने लगा। पुण्य की वृद्घि और उदारत से प्रसन्न होकर भगवान ने ब्राह्मण की गरीबी दूर कर दी।

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