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आखिर क्यों, कबीरदास जी वेश्या के साथ-साथ चल दिए

Fri, 13 Jun 2014 08:19 AM IST
Updated Fri, 13 Jun 2014 08:19 AM IST
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कबीरदास जी महानसंत श्रीरामानंद जी के शिष्य थे। इन्हें भगवान राम के अलावा किसी चीज से कोई स्नेह ही नहीं था। इसलिए एक बार भक्त कबीर की मदद के लिए भगवान राम स्वयं व्यापारी का वेष बनाकर इनके घर पधारे और घर की जरुरत का सारा सामान इनकी पत्नी को दे गए।

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जब कबीरदास जी को इस बात का ज्ञान हुआ तो खुशी से झूम उठे और सारा सामान जरुरतमंदों में बांट दिया। ऐसे महान संत को एक बार वेश्या का सहारा लेना पड़ा जिसके कारण इन्हें भला बुरा भी सुनना पड़ा।
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कबीरदास ने तब लिया एक वेश्या का सहारा

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कबीरदास जी की प्रतिष्ठा और ख्याति दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी। लेकिन संत को प्रतिष्ठा और ख्याति की क्या जरुरत वह तो भगवान की भक्ति करना चाहता है बस। कबीरदास जी भी यही चाहते थे। अपनी बढ़ती ख्याती के कारण इन्हें भक्ति भजन में परेशानी महसूस होने लगी।

इन्होंने इस समस्या का निदान करने के लिए एक दिन एक वेश्या को साथ लिया और उसके साथ चल दिए। जिन्होंने भी कबीरदास को वेश्या के साथ देखा उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। लोग यह कहने लगे कि इनके जैसा संत अगर माया से मोहित हो सकता है तो साधारण लोग भला कैसे बचेंगे। लेकिन अपनी आलोचना से कबीरदास प्रसन्न थे। कबीर सोच रहे थे अब लोग कम जुटेंगे तो प्रभु भक्ति का समय मिलेगा।

लेकिन सच्चे संत की ज्योति कहां छिपती है। एक दिन काशी के राजा के दरबार में इन्होंने एक ऐसा चमत्कार दिखाया कि लोगों को अपनी भूल का एहसास हो गया और सभी कबीरदास जी की भक्ति भाव का जयजयकार करने लगे।

कबीरदास ने दिखाए चमत्कार

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एक बार काशी के राजा के दरबार में कबीरदास जी पहुंचे। लेकिन कबीर के शिष्य होते हुए भी काशी के राजा ने कबीर का स्वागत नहीं किया क्योंकि वह वेश्या के साथ कबीर के नाते वाली घटना से नाराज थे। दरबार में बैठे कबीरदास जी अचानक उठे और जमीन पर पानी गिरा दिया।

कबीर के ऐसा करने से सभी हैरान हुए। काशी राज ने इस व्यवहार का कारण पूछा तो कबीर ने कहा कि पुरी में जगन्नाथ जी का रसोइया जगन्नाथ जी के लिए भोग ले जा रहा था, उसका पांव जलने वाला था। इस महान संत का जन्मदिन इस वर्ष 13 जून को मनाया जा रहा है।

इसलिए पानी गिरा दिया। राजा ने कबीरदास की इस बात की जांच करवाई और बात सच निकली। लोगों के मन से कबीर के प्रति जो बुरे विचार आए थे सब दूर हो गए।

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