फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   apply sermon to your life sudarshan maharaj

प्रवचन सिर्फ सुनें नहीं, जीवन में शामिल करें: सुदर्शनजी

Tue, 06 Nov 2012 02:41 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क। Updated Tue, 06 Nov 2012 02:41 PM IST
विज्ञापन
apply sermon to your life sudarshan maharaj
हम अक्सर कहते है कि हम वेद, उपनिषद पढ़ते है, मनीषियों और सन्तों के प्रवचन सुनते है, लेकिन उनका हमारे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव क्यों नही पड़ता? इसका एकमात्र कारण यह है कि हमारे जीवन का लेंस इतना संवेदनशील है कि हमारे सामने जो भी दृश्य आते है, वह तुरन्त उसे ग्रहण कर लेता है। यह लेंस अपने पास एकत्रित सभी पुराने चित्रों को मिटा देता है। इसका परिणाम यह होता है कि हमारे मस्तिष्क पर बनने वाला वर्तमान चित्र तो स्थाई हो जाता है, लेकिन उसके पहले के सभी चित्र गौण हो जाते है।
विज्ञापन


यही कारण है कि सन्त-महात्माओं के प्रवचनों का प्रभाव हमारे जीवन पर स्थिर नही हो पाता है। जब हम ग्रन्थों को पढ़ते है और प्रवचन सुनते है, तो उस क्षण तो हम उन सभी बातों को अपने जीवन में उतार लेते है, लेकिन जैसे ही उस जगह से हटते है, इस संसार के विकार, इसकी दृष्प्रवृत्तियां, सांसारिक मोह, ममता और अहंकार-ये सभी चीजें फिर से हमारे चारों ओर खड़ी हो जाती है।
विज्ञापन


हम अनेक सन्तों के प्रवचन सुनते है, उनका आशीर्वाद ग्रहण करते है, ग्रन्थों का अध्ययन करते है, धार्मिक, अनुष्ठान तथा अन्य पूजा पाठ करते है। लेकिन इन त्योहारों अथवा किसी धार्मिक आयोजन से बाहर आते ही हमारा जीवन पर पुनः उसी ढर्रे पर आ जाता है, जैसा हमारे उस आयोजन में जाने से पहले था। हम जैसे पहले थे, वैसे ही दोबारा हो जाते है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसा इसलिए होता है कि हम सत्संग केवल सुनते हैं। मेरे ख्याल से ऐसा करने से कोई फायदा नहीं अपितु समय की बर्बादी ही है। इसलिए अगर आप सत्संग का सही उपयोग करना चाहते हैं तो सत्संग को सिर्फ सुनें नहीं उसकी साधें। सत्संग सुनते समय उसे अपने जीवन से जोड़ कर देखें।


आचार्य श्री सुदर्शनजी महाराज
श्री सुदर्शनजी का जन्म 2 जून 1937 में हुआ था। आचार्य जी ने अपना संपूर्ण जीवन मानव समाज की भलाई के लिए समर्पित कर दिया और अलग-अलग रास्तों से समाज सेवा और मानव विकास की मंजिल की ओर बढ़ते गये। आचार्य ने समाज में ज्ञान का दीपक जलाने के लिए कई पुस्तकें भी लिखी। ये एक अच्छे स्कॉलर तो हैं ही साथ ही चिंतक और दार्शनिक भी हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed