Guruvar Mantra: गुरुवार के दिन करें इन 5 मंत्रों का जाप, होंगी सभी इच्छाएं पूरी
गुरुवार के दिन केले के पेड़ के नीचे बैठकर पूजन किया जाता है। साथ ही विष्णु जी को चना, गुड़ और हल्दी का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही गुरुवार को भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए कुछ मंत्रों का जाप करना चाहिए।
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Guruvar Mantra: गुरुवार गुरु बृहस्पति द्वारा शासित है और भगवान विष्णु को समर्पित है। भगवान विष्णु तीनों देवताओं में से एक है। भगवान विष्णु को पालन कर्ता या ब्रह्मांड के रक्षक के रूप में जाना जाता है और वे पृथ्वी पर जीवन का पालन-पोषण करते हैं। भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और मोक्ष प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि गुरुवार के दिन केले के पेड़ के नीचे बैठकर पूजन किया जाता है। साथ ही विष्णु जी को चना, गुड़ और हल्दी का भोग लगाया जाता है। लक्ष्मी कृपा पाने के लिए भगवान विष्णु की कृपा पाना अत्यन्त अवश्यक है क्योंकि लक्ष्मी उन्हीं के चरणों में रहकर उनकी दासी बनना पसंद करती हैं। शास्त्रों में या भगवान विष्णु के किसी भी चित्रपट अथवा श्री स्वरूप का ध्यान करके देखें मां लक्ष्मी सदैव उनके चरणों में बैठी उनके चरण दबाती ही दिखती हैं। जो लोग भगवान विष्णु के चरण कमलों का नित्य ध्यान करते हैं माता लक्ष्मी उनके घर में स्थाई बसेरा बना लेती हैं। गुरुवार को भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए कुछ मंत्रों का जाप करना चाहिए। आइए जानते हैं गुरुवार को किन मंत्रों का जाप करके भगवान विष्णु को प्रसन्न किया जा सकता है।
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धन प्राप्ति के लिए
जीवश्चाङ्गिर-गोत्रतोत्तरमुखो दीर्घोत्तरा संस्थित: पीतोश्वत्थ-समिद्ध-सिन्धुजनिश्चापो थ मीनाधिप:।
सूर्येन्दु-क्षितिज-प्रियो बुध-सितौ शत्रूसमाश्चापरे सप्ताङ्कद्विभव: शुभ: सुरुगुरु: कुर्यात् सदा मङ्गलम्।।
श्रीहरि विष्णु को प्रसन्न करने के लिए
दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
शांताकारम भुजङ्गशयनम पद्मनाभं सुरेशम।
विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम।
लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म।
वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकेकनाथम।
ॐ नमोः नारायणाय नमः।
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः।
माता लक्ष्मी की कृपा के लिए
ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।
बीजमंत्र
ॐ बृं बृहस्पतये नम:।
ॐ क्लीं बृहस्पतये नम:।
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:।
ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:।
ॐ गुं गुरवे नम:।