Shitla sashti vrat 2021: इस दिन है शीतला षष्ठी व्रत, जानिए महत्व, तिथि और पूजा विधि
माघ माह में शुक्ल शुक्ल पक्ष की षष्ठी(छठी) तिथि को शीतला षष्ठी व्रत किया जाता है । इस बार शीतला षष्ठी का व्रत 3 फरवरी को किया जाएगा। इस व्रत को मुख्य रूप से महिलाएं करती हैं। इस दिन माता शीतला का विधिवत पूजन करना चाहिए। माना जाता है कि इस व्रत को करने से मन को शीतलता मिलती है। शीतला षष्ठी के दिन ठंडा भोजन किया जाता है। यह समय सर्द ऋतु के जाने का होता है, इस व्रत और पूजन करके माता शीतला से रोग-विकार से मुक्ति की कामना की जाती है। पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखने वाली स्त्रियों के लिए यह व्रत बहुत शुभ माना गया है। तो चलिए जानते हैं शीतला षष्ठी व्रत का महत्व, तिथि और पूजा विधि...
शीतला षष्ठी व्रत का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार शीतला षष्ठी व्रत को करने से दैहिक और दैविक ताप से मुक्ति मिलती है। इस व्रत के बारे में मान्यता है कि यह व्रत पुत्र प्रदान करने वाला और सौभाग्य प्रदान करने वाला है। शीतला षष्ठी का व्रत करने से चेचक रोग से भी बचाव होता है। आगे जानिए शीतला षष्ठी व्रत की विधि...
शीतला षष्ठी व्रत विधि
शीतला षष्ठी व्रत के दिन प्रातः जल्दी उठें और स्नान करने के पश्चात व्रत का संकल्प लें।
उसके बाद लकड़ी के पटरे या चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाएं और उस पर शीतला माता की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें।
पूजा करने के लिए स्वयं के लिए भी आसन बिछाएं और शीतला माता का पूजन करें।
शीतला माता का पूजन करते समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है, आप चाहें तो किसी पुरोहित की सहायता भी ले सकते हैं।
शीतला षष्ठी को बरतें ये सावधानियां
इस दिन ध्यान रखें कि गर्म खाद्य-पदार्थ का सेवन भूलकर भी न करें।
शीतला षष्ठी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। रात में ही सारा भोजन हलवा, गुलगुले, रेवड़ी आदि तैयार करके रख लेना चाहिए।
इस दिन गर्म पानी से स्नान करना भी वर्जित माना गया है। इसलिए शीतला षष्ठी पर शीतल जल से ही स्नान करें।