फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Ram Mandir ›   Ram Navami 2024 Ram Hanuman Milan story in hindi

Ram Navami 2024: पहली बार इस जगह हुई थी भगवान राम और हनुमान जी की मुलाकात

Sun, 07 Apr 2024 01:15 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Sun, 07 Apr 2024 01:15 PM IST
सार

हिंदू धर्म में रामायण को बहुत ही पवित्र ग्रंथ माना जाता है। इसमें रचित सभी गुण जीवन के लिए हितकारी है। ये सभी गुण व्यक्ति को सत्य व सफलता के मार्ग बताते हैं।

विज्ञापन
Ram Navami 2024 Ram Hanuman Milan story in hindi
Ram Hanuman - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

Ram Navami 2024: 'रामायण' हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथों में से एक है। इसमें रचित सभी गुण जीवन के लिए हितकारी है। ये सभी गुण व्यक्ति को सत्य व सफलता के मार्ग बताते हैं। रामायण में भगवान श्री राम के गुणों का उल्लेख किया गया है। साथ ही उनके जीवन के संघर्षों का भी जिक्र है। माना जाता है कि रोजाना रामायण का पाठ करने से जीवन के सही मौल का पता चलता है। साथ ही व्यक्ति के सभी दुख और तकलीफ भी खत्म हो जाती है।

विज्ञापन


रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं है बल्कि यह मनुष्य को जीवन की सीख देता है। रामायण में भगवान राम को पुरुषोत्तम कहा गया है और माता सीता की पवित्रता को दर्शाया है। रामायण में घटी सभी घटनाओं का विशेष महत्व है। हालांकि, भगवान राम और हनुमान जी का मिलन सबसे खास रहा है। सभी जानते हैं कि हनुमान जी राम जी के सबसे बड़े भक्त है। लेकिन हनुमान जी भगवान राम को कहां मिले थे ये कम लोग जानते हैं। इसी कड़ी में आइए विस्तार से जानते है कि भगवान राम और हनुमान जी की पहली मुलाकात कहां हुई थी।

विज्ञापन

यहां हुई थी भगवान राम और हनुमान जी की पहली मुलाकात
भगवान राम और हनुमान जी की पहली मुलाकात को लेकर कहा जाता है कि जब त्रेता युग में प्रभु श्री राम भाई लक्ष्मण और माता सीता के वनवास पर थे। तब उस दौरान रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था। माता सीता के हरण करने के बाद रावण उन्हें अपने साथ लंका में ले आया था। वहीं दूसरी और प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण जी को जब माता सीता आश्रम में नहीं मिली तो वह उन्हें वनों में ढूंढने निकल पड़े। इस दौरान बाली और सुग्रीव के बीच युद्ध चल रहा था। इस युद्ध में सुग्रीव को हार का सामना करना पड़ा। जिसके बाद बाली के भय से सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत की गुफा में जाकर छिप गए थे। ये पर्वत पवन देव के राज में अवस्थित था। इस जगह हनुमान जी अपने आराध्य देव प्रभु श्रीराम की तपस्या में लीन रहते थे। भगवान राम और लक्ष्मण जी माता सीता को ढूंढते हुए ऋष्यमूक पर्वत जा पहुंचे।

इस दृश्य को देख सुग्रीव भयभीत हो उठे और उन्होंने हनुमान जी से जाकर कहा कि ...हे पवनपुत्र मेरी रक्षा करें... आप जाकर पता करें कि ये दोनों मायावी मनुष्य कौन हैं? यदि ये बाली के भेजे दूत हैं, तो मैं यहां से यथाशीघ्र गमन कर जाऊंगा। ये सुनते ही हनुमान जी ब्राह्मण रूप धारण कर प्रभु के पास पहुंचकर बोले-हे मानव आप दोनों कौन हैं ? और यहां इस पर्वत पर किस उद्देश्य से आए हैं ?हनुमान जी की ये बात सुन प्रभु श्रीराम बोले-मैं अयोध्या नरेश दशरथ का अग्रज पुत्र राम और ये मेरा अनुज लक्ष्मण है। मैं अपनी पत्नी सीता को ढूढ़ रहा हूं, जिन्हें किसी मायावी रावण ने हर लिया है। 

राम जी के ये बोल सुनकर हनुमान जी भाव विभोर हो गए और करुण भाव में भगवान राम के चरण में गिरकर बोले-प्रभु मुझे क्षमा कर दें, मैं निमित मात्र अपना कार्य कर रहा था।इसके बाद भगवान राम जी ने हनुमान जी को अपने गले से लगाया और कहा....हे वानर तुम क्षणिक मात्र भी ग्लानि या पश्चाताप न करें। तुम मेरे लिए उतने ही प्रिय हो, जितने मेरे अन्य अनुज हैं। इसी दिन पहली बार हनुमान जी की मुलाकात प्रभु श्रीराम से हुई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed