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आप भी मानेंगे कि ऐसी सुंदरता से बदसूरती अच्छी
विष्णु शर्मा
Updated Thu, 13 Nov 2014 03:39 PM IST
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जंगल में रहनेवाले कौए को कोई कष्ट नहीं था। वह सुख-चैन से जी रहा था। एक दिन उसने एक हंस को देखा और उसकी उजली धवल काया देखकर सोचने लगा कि यह हंस कितना सफेद है, और मैं कैसा काला हूं। यह हंस जरूर दुनिया का सबसे खुश पक्षी होगा। कौआ हंस के पास गया और उससे अपने मन की बात कही।
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हंस ने जवाब दिया, नहीं भाई, ऐसा नहीं है। बहुत समय तक मुझे भी लगता रहा कि मैं दुनिया का सबसे सुंदर और सुखी पक्षी हूं। लेकिन एक दिन मैंने एक तोते को देखा, जिसके शरीर के दो रंगों की छटा अनूठी थी। जबकि मेरे पास तो केवल एक ही रंग है। मुझे लगता है कि तोता ही दुनिया का सबसे सुंदर और सुखी पक्षी है।
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कौआ तोते के पास गया। उससे भी वही बात कही। तोते ने कहा, जब तक मैंने मोर को नहीं देखा था, तब तक मुझे अपने रूप-रंग पर बड़ा गुमान था। मगर मेरे दोरंगी पंखों का मोर के रंग-बिरंगे पंखों और मनोहारी नृत्य से भला कैसा मुकाबला! कौआ फिर मोर को खोजने चला।
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उसे मोर एक चिड़ियाघर में मिला। उसके पिंजड़े के बाहर सैकड़ों लोग उसकी सुंदरता की सराहना कर रहे थे। जब लोग वहां से चले गए, तो कौए ने मोर से कहा, तुम कितने सुंदर हो! हजारों लोग तुम्हें रोज देखने आते हैं। मुझे देखकर तो वे यों ही दुत्कार देते हैं। तुम तो दुनिया के सबसे सुखी और खुश रहने वाले पक्षी होगे।
मोर ने कहा, मुझे भी यही लगता था भाई कि मैं दुनिया का सबसे सुंदर और खुश पक्षी हूं। मगर मेरी सुंदरता ही मेरी शत्रु है। उस सुंदरता के कारण अब मैं इस चिड़ियाघर में कैद हूं। मुझे यह लगने लगा है कि मैं मोर न होकर एक कौआ होता, तो आजाद होता और मनमर्जी से कहीं भी घूमता-फिरता।