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शिवाजी के गुरू को कैसे कृष्ण में दिखे राम और राधा में सीता

Fri, 06 Dec 2013 09:31 AM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Fri, 06 Dec 2013 09:31 AM IST
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vithoba is ram and rakhubai is sita

समर्थ गुरु संत रामदास श्रीराम के परम उपासक थे। महाराष्ट्र में जगह-जगह उन्होंने श्रीराम तथा हनुमान मंदिर स्थापित किए। वह कहा करते थे, यदि हनुमान जी को प्रसन्न करना है, तो उनके समान महावीर बनो। अखाड़ों में जाकर व्यायाम करो और शरीर को पुष्ट करो।

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भगवान श्रीराम का काज पूरा करने के लिए सदैव तत्पर रहो। स्वामी रामदास ने ही छत्रपति शिवाजी को श्रीराम की तरह न्याय और धर्म की रक्षा के लिए सतत संघर्ष करने की प्रेरणा दी थी।
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स्वामी रामदास एक बार महाराष्ट्र के पंढरपुर पहुंचे। वहां श्रीकृष्ण की प्रतिमा है, जिन्हें 'विठोबा' या 'विट्ठल कृष्ण' के नाम से पुकारा जाता है। स्वामी रामदास भगवान श्रीराम के उपासक थे। उन्होंने पंढरपुर की तुलना अयोध्या से और विठोबा की तुलना श्रीराम से करते हुए कहा, काय केली अयोध्यापुरी, येथे वसविली पंढरी, काय केली सरयू गंगा, येथे अणिली चंद्रभागा।
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अर्थात, यहां पंढरपुर में मेघवर्ण के सांवले विठोबा कृष्ण मेरे राम हैं और रखुबाई (रुक्मिणी) सीता माता। अयोध्या जाकर और सरयू नहाकर क्या करूंगा। यहीं पंढरपुर में रहूंगा और चंद्रभागा नदी में स्नान करूंगा। उन्होंने लिखा, यहां के ग्वाल-बाल ही मेरे राम के वानर हैं। इन्हीं में अपने हनुमान जी के दर्शन करूंगा।

उल्लेखनीय है कि शंकराचार्य, संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत नामदेव आदि संतों ने भी कभी श्रीराम और श्रीकृष्ण में भेदभाव नहीं किया।

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