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एक अंगूठी की कीमत एक हजार सोने के सिक्के
सूफी कथा
Updated Fri, 10 Oct 2014 03:48 PM IST
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बहुत पुरानी बात है। मिस्र में जुन्नुन नाम के एक सूफी संत रहते थे। एक नौजवान ने उनसे पूछा कि आप जैसे लोग सिर्फ एक चोगा ही क्यों पहने रहते हैं! बदलते वक्त के साथ यह जरूरी है कि लोग ऐसे लिबास पहनें, जिनसे उनकी शख्सियत सबसे अलहदा दिखे।
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जुन्नुन मुस्कराए और उंगली से एक अंगूठी निकालकर बोले, 'बेटे, मैं तुम्हारे सवाल का जवाब जरूर दूंगा, पर पहले तुम मेरा एक काम करो। इस अंगूठी को सामने के बाजार में एक अशर्फी में बेचकर दिखाओ।' नौजवान ने जुन्नुन की सीधी-सादी अंगूठी को देखकर कहा, 'इसे तो कोई चांदी के एक दीनार में भी नहीं खरीदेगा!'
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'कोशिश करके देखो, शायद तुम्हें कोई खरीदार मिल जाए', जुन्नुन ने कहा। नौजवान तुरंत ही बाजार रवाना हो गया। उसने वह अंगूठी बहुत से सौदागरों, परचूनियों, साहूकारों को दिखाई, पर कोई भी एक अशर्फी देने को तैयार नहीं हुआ। हारकर उसने जुन्नुन को जाकर कहा, 'कोई भी चांदी के एक दीनार से ज्यादा देने के लिए तैयार नहीं है।'
जुन्नुन ने मुस्कराते हुए कहा, 'अब तुम सुनार की दुकान पर जाओ। पर उसे कीमत मत बताना, बस यही देखना कि वह इसकी क्या कीमत लगाता है।' नौजवान बताई गई दुकान तक गया और वहां से लौटते वक्त उसके चेहरे पर कुछ और ही बयां हो रहा था। उसने जुन्नुन से कहा, 'आप सही थे। बाजार में किसी को भी इस अंगूठी की सही कीमत का अंदाजा नहीं है। सुनार ने एक हजार अशर्फियों की पेशकश की है।'
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जुन्नुन ने मुस्कराते हुए कहा, यही तुम्हारे सवाल का जवाब है। किसी इन्सान की कीमत लिबास से मत आंको, नहीं तो तुम बेशकीमती नगीनों से हाथ धो बैठोगे। दिल की निगाह से देखने की कोशिश करो।