{"_id":"231fc0b9d30ea5146e430dbfaab54192","slug":"treatment-of-unwanted-flowers-and-plants-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"जब परिवार में कोई अनचाहा सदस्य आ जाए तो क्या करें?","category":{"title":"Metaphysical","title_hn":"परामनोविज्ञान","slug":"metaphysical-parasychology"}}
जब परिवार में कोई अनचाहा सदस्य आ जाए तो क्या करें?
स्वामी चिन्मयानंद
Updated Mon, 06 Oct 2014 12:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सर्दियों का पूरा मौसम सेठ अमृतराय ने अपने बगीचे की देख-रेख में बिताया। छह कंपनियों के मालिक अमृतराय का कारोबार इस कामयाबी तक पहुंच गया था कि वह अपने व्यवसाय से ज्यादा दूसरे कामों में रुचि लेने लगे थे। इन कामों में फूल लगाने और उपवन की सार-संभाल करने का काम भी शामिल था।
विज्ञापन
उन्होंने जतन से जो उपवन लगाया था, उसके फूलों की छटा वसंत आते ही हर तरफ बिखरने लगी थी। बेहतरीन गुलाबों और दूसरे शानदार फूलों के बीच कुछ जंगली फूल भी झांकते दिख गए।
विज्ञापन
पढ़ें,शरद पूर्णिमा को चन्द्रग्रहण, कैसा रहेगा आप पर प्रभाव
सेठ अमृतराय ने उन फूलों को उखाड़कर फेंक दिया। कुछ दिन के भीतर वे जंगली फूल और खर-पतवार फिर उग आए। सेठ के कर्मचारियों ने उन अनचाहे फूलों और पौधों को फिर उखाड़ दिया। तीसरी बार भी वे फूल वापस उग आए, तो सेठ ने वनस्पति विशेषज्ञ को बुलावाया और समस्या का हल पूछा।
विज्ञापन
विशेषज्ञ ने बताया कि जो दवाएं खर-पतवार को नष्ट करने के लिए छिड़की जाती हैं, वे अच्छे फूल-पौधों को भी नुकसान पहुंचा रही हैं।
पढ़ें,साप्ताहिक राशिफलः 6 अक्तूबर से 12 अक्तूबर तक
निराश होकर सेठ ने उपाय पूछा। विशेषज्ञ ने कहा, ये जंगली फूल और खर-पतवार तो किसी परिवार की तरह है, जहां बहुत सी बातें अच्छी होती हैं, लेकिन अनचाही तकलीफें भी हो जाती हैं।
सेठ अमृतराय ने फिर अपनी बात दोहराई और उपाय पूछा। इस पर उपवन विशेषज्ञ का सवाल था कि परिवार में रहते हुए अनचाही स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, तो हम लोग क्या करते हैं। सेठ ने कहा कि उन्हें बर्दाश्त करते और उन पर ध्यान नहीं देते हैं।
विशेषज्ञ ने कहा ठीक यही बात यहां भी लागू करना जरूरी है। अगर अनचाही वनस्पति से प्यार नहीं कर सकते हो, तो बस नजरंदाज करना सीखो। उनकी ख्वाहिश कोई नहीं करता, फिर भी वे पैदा होती हैं।