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क्या हुआ जब पुनर्जन्म लेकर वह लौटा पत्नी और बेटियों के पास

Mon, 06 Jul 2015 10:42 PM IST
दलाई लामा
दलाई लामा Updated Mon, 06 Jul 2015 10:42 PM IST
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Then neither the swan saw nor gold feathers

वाराणसी में एक शीलवान गृहस्थ रहता था। उसकी तीन बेटियां थीं। मगर बेटियों की शादी से पहले ही उसका निधन हो गया। मरने के बाद उसने एक हंस के रूप में जन्म लिया। उसके पंख सोने के थे। पिछले जन्म के संस्कार के कारण उसे पूर्वजन्म की घटनाएं याद थीं, यहां तक कि उसे मनुष्य योनि की भाषा भी याद रही।

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एक दिन जब परिवार के प्रति मोह का तीव्र आवेग आया, तो वह उनसे मिलने वाराणसी चला आया। वहां उसने देखा कि उसकी मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक दशा दयनीय हो चुकी थी। उसकी पत्नी और बेटियां अब सुंदर वस्त्रों की जगह चिथड़ों में दिख रही थीं । उसने उन्हें अपना एक सोने का पंख दिया, ताकि उसे बेचकर परिवार की दरिद्रता कम हो सके।
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इस घटना के बाद हंस अक्सर उनसे मिलने वाराणसी आता, और उन्हें सोने का एक पंख देकर चला जाता। एक दिन उसकी पत्नी की लोभी प्रवृत्ति ने जोर मारा। उसने बड़े प्यार से हंस को अपने करीब बुलाया और बड़ी बेदर्दी से उसकी गर्दन पकड़ कर सारे पंख नोच डाले। मगर उसके हाथों में सिर्फ साधारण पंख ही आए, क्योंकि हंस की इच्छा के विरुद्ध नोचे जाने पर पंख साधारण हंस के समान हो जाते थे।
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जब यह घटना हुई, तब बेटियां वहां नहीं थीं। जब वे लौटकर आईं, और अपने पूर्व-जन्म के पिता को पंखविहीन खून से सना देखा, तो सारी बात समझ गई। उन्होंने हंस की भरपूर सेवा सुश्रुषा की, और कुछ ही दिनों में उसे स्वस्थ कर दिया। स्वाभाविक ही उसके पंख फिर से आने लगे। मगर अब वे सोने के नहीं थे। जब हंस के पर्याप्त पंख निकल आए, तो वह उस घर से उड़ गया। फिर वह कभी वाराणसी में दिखाई नहीं दिया।

-दलाई लामा के सान्निध्य में धर्मशाला में पढ़ी गई जातक कथा

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