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जब कब्र की मिट्टी ही बन गई जिंदगी की डोर
ओशो
Updated Thu, 15 May 2014 09:11 AM IST
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गांव में किसान का एक गधा सूखे कुएं में गिर गया। काफी सोच-विचार के बाद किसान इस नतीजे पर पहुंचा कि गधा काफी बूढा हो गया है। उसे बचाने का कोई फायदा नहीं, इसलिए उसे कुएं में ही दफना देना चाहिए। उसने अपने पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने फावड़ा लिया और कुएं में मिट्टी डालने लगे।
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ऊपर से मिट्टी डालते देख गधा पहले तो रोया-रेंका, फिर वह अचानक शांत हो गया। आवाज आनी बंद हो जाने पर किसान ने कुएं में झांककर देखा। नीचे देखकर वह चौंक गया। उसने देखा कि ऊपर फेंकी जा रही मिट्टी के गिरते ही गधा एक अजीब हरकत कर रहा है। वह हिल-डुलकर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता और उस पर चढ़ जाता।
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जैसे-जैसे किसान और उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते, वैसे-वैसे वह मिट्टी को गिरा कर उसकी सीढ़ी बनाता और ऊपर चढ़ जाता। और इस तरह जल्दी ही सबको हैरत में डालता हुआ वह गधा कुएं के किनारे पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।
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हमें ध्यान रखना चाहिए कि जीवन में भी हर किसी पर मिट्टी फेंकी जाती है। बहुत तरह की गंदगी हमारे ऊपर गिरती है। जैसे बिना वजह आलोचना झेलनी पड़ती है। रास्ते में बेवजह रोड़े अटकाए जाते हैं। ऐसे में थक-हारकर यों ही कुएं में ही नहीं पड़े रहना चाहिए। उस अवरोध को सीढ़ी बनाकर अपने आपको गर्त से बाहर निकाल लेना ही बुद्धिमानी है।