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अपनी हैसियत से बड़ी छलांग
सोमदेव शर्मा
Updated Sun, 11 Jan 2015 07:40 PM IST
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एक दिन एक कौए ने विशालकाय गरुड़ को आकाश में उड़ते देखा। वह भेड़ का छोटा मेमना अपने पंजे में दबाए बहुत ऊंचाई पर उड़ रहा था। इतनी उंचाई पर और तेजी से उड़ने के कारण कोई और पक्षी रास्ते में नहीं आ रहे थे। कौए ने सोचा कि बढ़िया भोजन पाने का यह अच्छा तरीका है। मैं भी इसी तरह एक मेमना पकड़ लूंगा और गरुड़ की तरह ऊंचाई पर उड़ूंगा।
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कौआ पेड़ से छलांग लगाकर भेड़ों के एक झुंड पर झपटा और उसने एक मेमने को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन भेड़ का एक छोटा-सा मेमना भी कौए के लिए बहुत बड़ा शिकार था! उसे लेकर उड़ नहीं सकता था। फिर भी उसने कोशिश की। मगर कई कोशिशों के बाद भी वह नाकाम रहा। वह वापस पेड़ की डाल पर जाकर बैठ गया।
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थोड़ी देर बाद उसके मन में फिर आया कि एक बार और कोशिश की जाए। उसने नए सिरे से फिर हिम्मत जुटाई और मेमने पर झपट्टा मारा। मेमने को उसने पकड़ लिया, उसे नोचने-खसोटने लगा, पर उठाने में कामयाब नहीं हुआ। जब कौए ने उसे छोड़कर उड़ने की कोशिश की, तो पाया कि उसके पंजे मेमने के ऊनी रोओं में फंस गए थे। कौए ने स्वयं को छुड़ाने की भरसक कोशिश की, लेकिन कुछ न हुआ। किसान ने यह सब देखा, तो उसने कौए को पकड़ लिया और उसे अपने घर ले आया।
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मेमने के रोंए कौए के पंजों में फंसकर उसकी शक्ल सूरत बिगाड़ चुके थे। बच्चों ने पूछा, यह कैसा पक्षी है, पिताजी? किसान हंसते हुए बोला, बच्चो, कुछ समय पहले तक तो इसे लगता था कि यह गरुड़ है। अब इसे पता चल गया होगा कि यह तो सिर्फ एक कौआ ही है। अगर इस बात को इसने हमेशा याद रखा होता, तो आज यह आजाद पक्षी होता।