{"_id":"75c75790b9651c44be36bd9c4d1e25c6","slug":"thanks-for-food","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान को नहीं मानने वाले को अंत समय में दिखे भगवान","category":{"title":"Metaphysical","title_hn":"परामनोविज्ञान","slug":"metaphysical-parasychology"}}
भगवान को नहीं मानने वाले को अंत समय में दिखे भगवान
फादर पियो
Updated Mon, 09 Jun 2014 08:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अफ्रीका के जंगल से गुजरते समय एक नास्तिक वैज्ञानिक प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना कर रहा था। वह अपने आप से यह भी कह रहा था कि लोग व्यर्थ ही इस अस्तित्व का श्रेय ईश्वर को देते हैं। यह तो अपने आप निर्मित हुआ है। तभी पीछे झाड़ियों में कुछ आहट हुई। एक शेर झपटा। वैज्ञानिक ने भागने की कोशिश की, लेकिन शेर ने उसे चित कर दिया। अब उसके मुंह से बरबस निकल पड़ा, भगवान बचाओ!
विज्ञापन
पढ़ें,साप्ताहिक राशिफलः 9 जून से 15 जून तक किस राशि पर सितारे मेहरबान
विज्ञापन
और चमत्कार हुआ। वातावरण में दिव्य प्रकाश व्याप्त हो गया, और एक आवाज आई, इतने वर्षों से तुम मुझे नकारते रहे और दूसरों को भी यह समझाते रहे कि मेरा कोई वजूद नहीं है। तुमने मेरी रची दुनिया को महज घटनाओं का संयोग कहा। यह सुनकर नास्तिक को कुछ न सूझा, वह बोला, मैं अब मरने ही वाला हूं, इसलिए झूठ नहीं बोलूंगा। मैं अब भी मानता कि तुम्हारा कोई अस्तित्व नहीं है।
विज्ञापन
पढ़ें,इस मंदिर में जो रात को ठहरा बन गया पत्थर का
फिर आकाशवाणी हुई, अच्छा, तो अब तुम मुझसे क्या चाहते हो? नास्तिक जानता था कि अब किसी संवाद की गुंजाइश नहीं है। इसलिए उसने कहा, मैं तो नहीं बदल सकता, लेकिन इस भयानक शेर को बदलकर आस्थावान बना दो!
उसी क्षण दिव्य प्रकाश लुप्त हो गया। शेर वैज्ञानिक के ऊपर से उतर गया। उसने श्रद्धा से अपना सिर झुकाया, और बोला, हे ईश्वर, मेरी भूख मिटाने के लिए तुमने उदारता दिखाई और यह भोजन सौंपा। तुझे लाख-लाख धन्यवाद।