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दूसरों को अमर होने का तरीका बताने वाला इसलिए खुद अमर नहीं हो सका
दुर्गादत्त शास्त्री
Updated Mon, 16 Mar 2015 03:22 PM IST
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किसी गांव में हरिदत्त नाम का एक वैद्य रहता था। उसका यह दावा था कि उसे अमरता का रहस्य पता है। उसके पास अमरता का रहस्य मालूम करने के लिए आने वालों का तांता लगा रहता था। हरिदत्त उन सभी से कुछ शुल्क लेता और बदले में उनको कुछ भी अगड़म-बगड़म बता देता था।
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उसके पास शुल्क चुकाकर और अमरता का रहस्य जानकर गए लोगों को कभी न कभी मौत तो आनी ही थी। खास बात यह थी कि परामर्श के लिए गए लोगों में से कभी-कभार कोई मरता था।
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सभी लोग तो एक साथ नहीं मरते। और यदा-कदा एकाध व्यक्ति के मरने पर वैद्य के अमरता के नुस्खे के बारे में अगर कोई सवाल करता, तो हरिदत्त कह देता था कि उस व्यक्ति को अमरता का रहस्य ठीक से समझ में नहीं आया।
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उस देश के राजा ने वैद्य हरिदत्त के बारे में सुना और उसको बुला लाने के लिए एक दूत भेजा। किसी कारणवश दूत को यात्रा में कुछ विलंब हो गया और जब वह वैद्य हरिदत्त के घर पहुंचा, तब उसे समाचार मिला कि वैद्य हरिदत्त कुछ समय पहले चल बसा था।
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दूत को हैरानी हुई। अमरता का रहस्य जानने वाले वैद्य के बारे में क्या बताए? डरते-डरते वह महल वापस आया और राजा से कहा कि उसे यात्रा में विलंब हो गया था और इस बीच वैद्य हरिदत्त की मृत्यु हो गई। राजा क्रोधित हो गया और उसने दूत को राजाज्ञा का पालन करने में देरी के लिए दंड देने का आदेश दिया।
चणक नाम के गांव के विद्वान पंडित को इस बारे में पता चला। सुनते ही वह राजा के महल गया और उससे बोला, आपके दूत ने पहुंचने में विलंब करके गलती की, पर आपने भी उसे वहां भेजने की गलती की। वैद्य हरिदत्त की मृत्यु यह सिद्ध करती है कि उसे अमरता के किसी रहस्य का पता नहीं था। अगर होता, तो उसकी मृत्यु ही नहीं हुई होती। रहस्य सिर्फ यही है कि ऐसा कोई रहस्य नहीं है।