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उस सेठ ने दान मांगने आई भगिनी निवेदिता को थप्पर क्यों मारा?

Mon, 09 Dec 2013 11:34 AM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Mon, 09 Dec 2013 11:34 AM IST
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rich man began repenting after seeing tolerance

भगिनी निवेदिता ने एक दिन देखा कि स्वामी विवेकानंद कह रहे थे कि बेसहारा अनाथ बच्चे साक्षात भगवान के समान हैं। यह सुनकर भगिनी निवेदिता ने संकल्प ले लिया कि वह बंगाल में अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए एक आश्रम की स्थापना करेंगी। इसके लिए वह कोलकाता के धनाढ्यों के पास पहुंचकर आश्रम के लिए दान मांगने लगीं।

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एक दिन वह किसी ऐसे सेठ के पास जा पहुंची, जो कंजूस था। उसने कहा, मैंने मेहनत से एक-एक पैसा जोड़ा है। आश्रम-वाश्रम में दान क्यों दूं? फिर भी निवेदिता बार-बार कुछ देने का आग्रह करती रहीं।
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इससे सेठ आपा खो बैठा और उसने भगिनी निवेदिता को थप्पड़ जड़ दिया। थप्पड़ खाकर भी युवती ने धैर्य से कहा, आपने मुझे थप्पड़ दिया, इसे मैं स्वीकार करती हूं। अब अनाथ बच्चों के लिए भी तो कुछ दीजिए।
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भगिनी निवेदिता की सहनशीलता और समर्पण देख सेठ अपने कृत्य पर पछताने लगा। उसने आलमारी से रकम निकालकर उन्हें भेंट कर दी।

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