इसलिए मरने के बाद वापस शरीर में आत्मा लौटा गए यमदूत
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यह घटना राजस्थान की है। यहां पर दो मुसलमान भाई रहते थे जो गाड़ी से माल ढोने का काम किया करते थे। एक दिन इनके पास काफी काम था और संयोग ऐसा बना कि पूरे दिन भोजन पानी का मौका ही नहीं मिला।
थक कर दोनों भाई एक बाग में पहुंचे वहां पहले से तीन लोग मौजूद थे जो भोजन बनाकर खा रहे थे। थकान के कारण दोनों भाइयों को नींद आ गई और वह सो गए।
दोनों भाईयों ने देखा कि उनकी मृत्यु हो गई है और यमदूत उन्हें लेकर यमपुरी पहुंच गए हैं। इन्होंने अपने सामने एक सिंहासन पर राजपुरुष को देखा जो यमराज थे।
यमराज ने यमदूतों से प्राण वापस करने के लिए कहा
यमराज ने यमदूतों से पूछा कि तुम इन लोगों को लेकर क्यों आए हो। इन दोनों ने आज निर्जल एकादशी का व्रत किया हुआ है।
यमराज ने आदेश दिया कि इन्हें जहां से लेकर आए हो वहां वापस छोड़ आओ। एकादशी के व्रत से इनके जीवन के कुछ दिन और बढ़ गए हैं।
मुसलमान भाइयों ने जब आंखें खोली तो दोनों ने एक दूसरे को अपने सपने के बारे में बताया जिससे दोनों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। अगले दिन इन्होंने पता किया तो पाया कि बीते हुए कल में एकादशी तिथि थी।
इन्होंने विचार किया कि अनजाने में एकदशी का व्रत हो जाने से इतना लाभ मिला है अगर नियमपूर्वक एकादशी का व्रत करें तो काफी पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद से इन भाइयों ने सारे एकादशी के व्रत रखने शुरु कर दिये।
इस घटना का उल्लेख श्री कृष्णबोधाश्रमजी महाराज ने किया है जो परलोक और पुनर्जन्म की सत्य घटना नामक पुस्तक में संकलित है।