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सांप की इस बात को सुनकर हैरान रह जाएंगे

Tue, 09 Sep 2014 01:25 PM IST
वियोगी हरि
वियोगी हरि Updated Tue, 09 Sep 2014 01:25 PM IST
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Refusing to do with the behavior of beneficence

एक लड़के को, जिसका नाम उल्लास था, रास्ते में पत्थर के नीचे सांप दबा हुआ दिखाई दिया। उल्लास को उस पर दया आ गई। उसने पत्थर हटाया और सांप से पूछा, तुम पत्थर के नीचे कैसे दब गए? सांप बोला, मैं एक चूहे को पकड़ने के लिए इस पत्थर के नीचे घुसा था, और मैं इसमें दब गया।

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जब लड़का जाने लगा, तो सांप ने कहा, मैं रात भर का भूखा हूं। भूख मिटाने के लिए मैं तुम्हें खाऊंगा। उल्लास बोला, मैंने तुम्हारी जान बचाई है और तुम मुझे ही खाना चाहते हो। सांप ने कहा, मुझे तेज भूख लगी है। इसलिए तुम्हें खाना मेरी मजबूरी है। दोनों अपनी-अपनी दलीलें देने लगे। काफी वाद-विवाद के बाद आखिरकार वे इस बात पर राजी हो गए कि किसी तीसरे से न्याय करवा लेते हैं।
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उन्हें एक भेड़िया आता दिखाई दिया। उल्लास ने उसे सारी बात बताकर न्याय करने को कहा। भेड़िये ने सोचा कि सांप लड़के को मारेगा, तो मेरा भी पेट भर जाएगा। उसने तुरंत सांप के पक्ष में फैसला सुना दिया। लड़के ने फैसला मानने से इन्कार कर दिया। तभी वहां एक नेवला आया। उल्लास ने नेवले से न्याय करने को कहा। सांप का दुश्मन नेवला बोला, इस सांप को वही सजा दो, जो एक दगाबाज को दी जाती है। सांप ने यह फैसला मानने से इन्कार कर दिया। फिर वहां एक आदमी आया।
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उसने सारी बात सुनकर आश्चर्य से कहा, सांप पत्थर के नीचे कैसे दब सकता है? सांप बोला, मैं बताता हूं। और सांप उसी जगह वैसे ही बैठ गया। लड़के ने तुरंत उस पर पत्थर रख दिया। आदमी ने लड़के से कहा, तुम जाओ, इसे यहीं दबकर मरने दो। उल्लास को समझ में आ गया कि जो किसी का उपकार नहीं मानते, उनके साथ कैसा व्यवहार वाजिब है।

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