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मरने के चार साल बाद वह लौट आया बीवी बच्चों के पास
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 13 Dec 2013 04:16 PM IST
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इस बात को सभी धर्मों में कहा गया है कि शरीर और आत्म दो अलग चीज है। आत्मा अमर है और यह एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर में प्रवेश कर जाता है। गरूर पुराण कहता है कि शरीर का त्याग करते समय आत्मा जीवन भर के कर्मों और ज्ञान को समेट लेता है इसलिए आत्मा को अपने पूर्वजन्म का ज्ञान होता है।
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परामनोविज्ञान के अनुसार कई बार पूर्व जन्म की इच्छाएं इतनी प्रबल हो जाती हैं कि अगले जन्म में भी इसकी स्मृतियां बनी रह जाती हैं। इसी प्रकार की एक घटना का उदाहरण प्रस्तुत है।
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टूंडला के गांव राजा का ताल निवासी दिनेश यादव की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया। परिवार में माता-पिता खुशी से झूमने लगे। परिवारीजनों ने बेटे का नाम गुलशन रखा। गुलशन जैसे-जैसे चीजों को जानने और समझने लगा उसे पूर्व जन्म की बातें याद आने लगीं। पहले तो परिवारीजनों ने इन बातों को नजरंदाज किया लेकिन बाद में उन्हें लगने लगा कि गुलशन को पूर्वजन्म की बातें याद आने लगी हैं।
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पढ़ें, इसलिए रह जाती है पूर्व जन्म की स्मृतियां
एक दिन गुलशन की तबीयत अचानक खराब हो गई तो उसके बाबा उसे टूंडला दवा दिलाने के लिए ले गए। वह जैसे ही दिनौली गांव के पास पहुंचे गुलशन ने अपने पूर्व जन्म के गांव को पहचान लिया। उसने बाबा से शिवपुरी गांव जाने की जिद की तो वह भी मना नहीं कर सके। बाबा ने उसे आधा किलोमीटर दूर अकेला छोड़ दिया। इसके बाद चार साल का मासूम सीधे अपने पैतृक मकान पर जा पहुंचा।
यहां पहुंचते ही उसने मां के पैर छुए और नम आंखों से पत्नी को देखा। बच्चे सामने आए तो उन्हें दुलार दिया। जिसने भी इस नजारे को देखा वह हैरान रह गए। गुलशन ने बताया कि उसका नाम जयसिंह था। चार साल पहले उसकी हत्या करके शव को कुएं में फेंक दिया गया था।
उसने हत्यारे का नाम भी बता दिया। शिवपुरी में अपनी मौत से पूर्व जयसिंह मकान का निर्माण करा रहा था। पूर्व जन्म की पत्नी और बच्चों को पाकर गुलशन अपने पिता के यहां जाने को राजी नहीं हुआ। बाद में उसे समझा बुझा कर घर भेजा गया।