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कहीं इनकी तरह आप भी न गंवा दें धनवान बनने का मौका
जेन कथा
Updated Mon, 12 May 2014 09:07 AM IST
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कहते हैं कि इराक के पुराने शहर सिकंदरिया के पुस्तकालय में जब भीषण आग लगी, तो कमोबेश सारी किताबें जल गईं। कुछ एक किताबें ही बचीं। उनमें से एक किसी आदमी ने खरीद ली। वह मामूली रूप से शिक्षित था। उसे किताब में एक पर्ची मिली। पर्ची पर पारस पत्थर के बारे में लिखा था- पारस पत्थर एक छोटा-सा कंकड़ है। हजारों दूसरे कंकड़ों के साथ एक सागर तट पर पड़ा है। उसकी पहचान यह है कि वह अन्य कंकड़ों की तुलना में थोड़ा गर्म महसूस होता है।
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वह आदमी पारस पत्थर ढूंढने के लिए समुद्र की ओर चल पड़ा। उसे लगा कि यदि वह कंकड़ों को उठा-उठाकर देखता रहा, तो एक ही कंकड़ कई बार उठाने में आ जाएगा, और काफी समय नष्ट होगा। इसलिए वह कंकड़ उठाता, उसे परखता और समुद्र में फेंक देता।
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ऐसा करते-करते वर्ष बीत गए। एक दिन उसने एक कंकड़ उठाया। वह गर्म था। इससे पहले कि वह कुछ सोचता, आदत से मजबूर उसने पत्थर समुद्र में फेंक दिया। फेंकते ही उसे लगा कि कितनी बड़ी गलती हो गई। वर्षों तक प्रतिदिन हजारों कंकड़ों को समुद्र में फेंकते रहने की आदत हो जाने के कारण उसने उस कंकड़ को भी समुद्र में फेंक दिया, जिसकी तलाश में उसने अपना सब कुछ छोड़ दिया था। ऐसा ही हम लोग अपने सामने मौजूद अवसरों के साथ भी करते हैं। उसे पहचानने की एक मामूली चूक से हम मौका गंवा देते हैं।