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सात पीढ़ियों के लिए जमा धन फिर भी इनकी चिंता देखिए
जयदयाल गोयंदका
Updated Fri, 26 Sep 2014 03:39 PM IST
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नगर सेठ अनंत विजय अपार धन-संपदा के स्वामी थे। एक दिन उन्हें अपनी संपत्ति के मूल्य निर्धारण की इच्छा हुई। उन्होंने तत्काल मुनीम को बुलाया और आदेश दिया कि उनकी संपत्ति का हिसाब लगाया जाए। सप्ताह भर बाद मुनीम ब्योरा लेकर सेठ के पास आया।
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उसने कहा, अभी आपके पास इतनी दौलत है कि आपकी सात पीढ़ी बिना कुछ किए आनंद से रह सकती है। मगर सेठ यह सोचकर चिंतित हो गया कि उसकी आठवीं पीढ़ी का क्या होगा। वह तनाव में रहने लगा। सेठानी से उसकी हालत देखी नहीं जा रही थी। उसने मन की स्थिरता और शांति के लिए सेठ को सत्संग में जाने को प्रेरित किया।
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सेठ समागम में पहुंचा और एकांत में संत को अपनी समस्या बताई। संत ने कहा, इसका हल बड़ा आसान है। बस्ती के अंतिम छोर पर एक बुढ़िया रहती है, एकदम कंगाल और विपन्न। उसे मात्र आधा किलो आटा दान में दे दो। अगर वह स्वीकार कर ले, तो तुम्हारी कामना पूरी हो जाएगी।
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सेठ कोई एक मन (करीब 37 किलो) आटा लेकर बुढ़िया के झोपड़े पर पहुंच गया और बोला, माताजी, मैं आपके लिए आटा लाया हूं। बूढ़ी मां ने कहा, आटा तो मेरे पास है, मुझे नहीं चाहिए। सेठ ने फिर रखने के लिए जोर दिया, तो वृद्धा ने कहा, मुझे आवश्यकता नहीं है। सेठ ने कहा, कोई बात नहीं, आधा तो रख लीजिए।
वृद्धा ने फिर मना कर दिया। इस तरह अनंत विजय दान की मात्रा घटाते रहे, और वृद्धा मना करती रही। अंत में सेठ ने कहा, कल के लिए ही सही, आधा सेर रख लीजिए। इस पर वृद्धा ने कहा, बेटा, कल की चिंता मैं आज क्यों करूं? जैसे हमेशा प्रबंध होता है, कल के लिए भी हो जाएगा। अनंत विजय को अपनी जिज्ञासा का हल मिल गया।