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जब एक धनवान पिता का घमंड तोड़ा खुद उसके बेटे ने
शिवकुमार गोयल
Updated Tue, 28 Jan 2014 09:29 AM IST
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एक धनाढ्य को अपनी अकूत संपत्ति का भारी घमंड हो गया। वह प्रायः अपने पुत्र से कहा करता कि सुख-सुविधा के जितने साधन उसके पास हैं, अन्य किसी के पास नहीं हैं।
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एक दिन वह पुत्र को कार में बिठाकर गांव में एक परिचित किसान के घर पहुंचा। किसान ने बड़े प्रेम से उसका स्वागत किया। मिट्टी की हंडिया में रखा गरम दूध उसे पिलाया, ताजा मक्खन, मट्ठे और सब्जी के साथ गरम-गरम रोटियां खिलाईं। लौटते समय कार में गुड़ व गन्ने रख दिए।
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लौटते समय सेठ ने पुत्र से पूछा, बेटा, देखा तुमने गांव की हालत। सच बताना तुम्हें कैसा लगा?
बेटे ने कहा, पिताजी! यदि सच ही जानना चाहते हैं, तो सुनिए। हमारे घर में केवल एक कुत्ता है, उस किसान के घर में चार गाएं और बैल बंधे हैं। उसके बच्चे ताजा हवा में झूले झूलकर किलकारियां मार रहे थे। हमारी कोठी के पिछवाड़े छोटा-सा स्विमिंग पुल है, जबकि किसान के घर के पास नदी बह रही थी।
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हम फ्रिज में रखी कई-कई दिन पुरानी सब्जियां खाते हैं, जबकि उसने ताजा सब्जियों से भोजन कराया। हम एकाकी जीवन बिताते हैं, मगर हम जब उस किसान के घर पहुंचे, तो कई लोग हमारे स्वागत के लिए आए थे। उनका अनूठा प्रेमपूर्ण व्यवहार देखकर मुझे लगा कि हमारे मुकाबले वे कहीं ज्यादा अच्छे इंसान हैं और हमसे ज्यादा अमीर भी।
पुत्र के शब्द सुनकर सेठ का अहंकार तुरंत काफूर हो गया। वह पानी-पानी हो गया।