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आप बताएं, क्या पति को वश में रखने के लिए सही है तंत्र मंत्र का सहारा
शिवकुमार गोयल
Updated Sat, 04 Jan 2014 01:33 PM IST
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महाभारत में एक कथा आती है। एक बार श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा तथा द्रौपदी एकांत में बैठी बातें कर रही थीं। अचानक सत्यभामा ने पूछा, सखी द्रौपदी, तुम्हारे पति कभी तुम पर क्रोध नहीं करते, उनमें ईर्ष्या भाव नहीं देखा जाता। वे सब के सब कैसे तुम्हारे वश में रहते हैं? क्या तुम इसके लिए किसी तंत्र-मंत्र का सहारा लेती हो?
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द्रौपदी ने कहा, बहन, तुम मुझसे ऐसा विचित्र प्रश्न क्यों कर रही हो? मैं तुम्हें एक रहस्य की बात बताती हूं कि कभी भी तंत्र-मंत्र का सहारा नहीं लेना चाहिए। यदि पति को पता चल जाए कि मेरी पत्नी तंत्र-मंत्र का प्रयोग कर वश में करने का प्रयास कर रही है, तो वह चिंतित रहने लगता है और फिर घर की सुख-शांति ही विदा हो जाती है।
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द्रौपदी ने आगे कहा, अहंकार, क्रोध व तंत्र-मंत्र से दूर रहकर मैं पांडवों की सेवा करती हूं। कभी अप्रिय वचन नहीं बोलती और सबका मान रखती हूं। मैं हमेशा अतिथियों के सत्कार के लिए तत्पर रहती हूं और पति को दान के पुण्य कार्य से रोकने का प्रयास नहीं करती। इन सब सहज कार्यों से मेरे पांचों पति सदैव प्रसन्न रहते हैं।
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यह सुनकर सत्यभामा बोली, बहन ये सब तो मैंने सहज जिज्ञासावश तुमसे पूछा। मेरे प्रियतम श्रीकृष्ण तो हर क्षण मुझसे बहुत प्रेम करते है।