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किसकी मौत कब आएगी यह राज बताया भगवान विष्णु ने गरुड़ को

Fri, 25 Sep 2015 03:44 PM IST
रमेश भाई ओझा
रमेश भाई ओझा Updated Fri, 25 Sep 2015 03:44 PM IST
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Like birth, death is too certain

उस दिन गरुड़ देव भ्रमण के लिए निकले। उन्होंने देखा कि पाटलिपुत्र के विष्णु मंदिर के चबूतरे पर बैठा कबूतर बेतरह कांप रहा था। इस निर्भय और सुरक्षित स्थान पर कपोत को कांपते देख गरुड़ ने आश्चर्यपूर्वक कारण पूछा। कपोत बोला, अभी यमराज आए थे। मुझे देखकर हंसे और बोले, कल प्रातःकाल इस अभागे की मौत आ जाएगी। सो मैं प्राण संकट की बात सोचकर अधीर हो रहा हूं, प्रभु!

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गरुड़ को दया आई और साथ ही यमराज को चुनौती देने की बात भी उन्हें सूझी। सो कबूतर को पंजों में दबाकर वह सुदूर यात्रा पर निकल पड़े और मलयगंध पर्वत की एक सुरक्षित गुफा में जाकर उसे रख दिया। दूसरी उड़ान में गरुड़ यमलोक पहुंचे और यमराज को बताया कि वह किस प्रकार कपोत को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा चुके हैं।
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यम ने विष्णु वाहन का आदर-सत्कार किया और चित्रगुप्त के पास से मृत्यु संबंधी लेखा-जोखा मंगाया। पूर्व व्यवस्था लिखी हुई थी कि पाटलिपुत्र के विष्णु मंदिर में रहने वाला कपोत अमुक तिथि को मलयगंध पर्वत की गुफा में विदंत सर्प द्वारा भक्षण किया जाएगा। वह मृत्यु मुहूर्त कुछ घड़ी पूर्व ही पूरा हुआ है। गरुड़ चकित रह गए। वह लौटकर पहुंचे, तो देखा कि सर्प उस कपोत को उदरस्थ कर चुका है। यह जानकर वह भारी मन से अपने अधिपति विष्णु के पास लौटे।

विष्णु ने उनकी उदासी का कारण पूछा, तो गरुड़ ने पूरी घटना बता दी। विष्णु ने कहा, जन्म की तरह मरण भी निश्चित है। नियत समय पर मरने से कोई बचता नहीं। नियति ने जो निर्धारित किया है, वैसा होता ही है। इस तथ्य को समझ कर लोग विपत्ति और रोग-शोक को स्वीकार कर सकें, तो वे डरकर सत्कर्म करने से नहीं चूक सकते। न ही शोक-संताप में सिर धुन सकते हैं।

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