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कृष्ण और ईसा दोनों का प्यार एक, जानेंगे वह कौन है?
शिवकुमार गोयल
Updated Fri, 28 Feb 2014 09:01 AM IST
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एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा, मैं उससे प्रेम करता हूं, जो हर प्राणी के प्रति करुणा की भावना रखकर उनसे प्रेम करता है, और उनकी सेवा करता है।
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ईसा ने कहा है, जो पड़ोसी से, अभावग्रस्त से प्रेम करता है और उसकी सहायता करता है, मैं उससे प्रेम करता हूं। अरब की एक प्राचीन कथा है। एक रात अबू ने देखा कि एक फरिश्ता किताब में कुछ लिख रहा है।
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बू ने फरिश्ते से पूछा, क्या लिख रहे हो? उसने बताया, मैं उन लोगों के नाम लिख रहा हूं, जो ईश्वर से प्रेम करते हैं। अबू ने जिज्ञासावश पूछा, क्या मेरा नाम इस सूची में है?
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फरिश्ते ने कहा, नहीं। अबू ने फिर कहा, कोई बात नहीं। तुम मेरा इतना काम कर दो कि मेरा नाम उस सूची में लिख दो, जो ईश्वर के बंदों से प्रेम करता है। फरिश्ते ने उसका नाम लिख लिया और गायब हो गया।
अगली रात फरिश्ता फिर आया। उसने अबू को उन लोगों के नाम दिखाए, जिन्हें ईश्वर ने अपना आशीर्वाद दिया था। अबू यह देखकर झूम उठा कि उसका नाम सूची में सबसे ऊपर था।
अबू को अब यकीन हो गया कि खुदा उसी से प्रेम करता है, जो उसके बंदों से प्रेम करता है। खुदा को खुश करने के लिए, उसका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उसके बंदों की बस्ती से गुजरना पड़ता है।
अतः हम सबको हमेशा ईश्वर के बंदों से प्रेम करने का प्रयास करते रहना चाहिए।