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मीट मछली खाते हैं तो आप भी जान लीजिए यह बात
चीनी कथा
Updated Wed, 10 Sep 2014 09:25 AM IST
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किसी नगर में रहने वाला एक धनी आदमी तीर्थयात्रा पर जा रहा था। उसने नगर के सभी लोगों को यात्रा की पूर्वरात्रि में भोजन के लिए आमंत्रित किया। सैकड़ों लोग खाने पर आए। कई तरह के लजीज पकवान भोज की शोभा बढ़ा रहे थे। भोज की समाप्ति पर सेठ विदाई भाषण देने के लिए खड़ा हुआ।
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सबको शुक्रिया कहने के बाद उसने कहा कि परमात्मा कितना कृपालु है कि उसने मनुष्यों के खाने के लिए मछलियों और पशुओं को जन्म दिया है। सभी लोगों ने हामी भरी। भोज में एक बारह साल का लड़का भी था। उसने कहा, आप गलत कह रहे हैं। लड़के की बात सुनकर वह आदमी लड़के की तरफ उत्सुकता से देखने लगा।
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लड़का बोला, मछलियां, मेमने एवं पृथ्वी पर रहनेवाले सभी जीव-जंतु मनुष्यों की तरह पैदा होते हैं और मनुष्यों की तरह उनकी मृत्यु होती है। कोई भी प्राणी किसी अन्य प्राणी से श्रेष्ठ और महत्वपूर्ण नहीं है। सभी प्राणियों में बस यही अंतर है कि अधिक शक्तिशाली और बुद्धिमान प्राणी अपने से कम शक्तिशाली और बुद्धिमान प्राणियों को खा सकता है।
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यह कहना गलत है कि ईश्वर ने मछलियों और मेमनों को हमारे लाभ के लिए बनाया है। बात सिर्फ इतनी है कि हम इतने ताकतवर और चालक हैं कि उन्हें पकड़ कर मार डालते हैं। मच्छर और पिस्सू हमारा खून पीते हैं, जबकि शेर और भेड़िये हमारा शिकार तक कर सकते हैं, तो क्या ईश्वर ने हमें उनके लाभ के लिए बनाया है?
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च्वांग-त्जु भी वहां मेहमानों के बीच बैठे हुए थे। वह अपनी कुर्सी से उठकर लड़के की बात पर ताली बजाने लगे। उन्होंने कहा, इस एक बालक में हजार प्रौढ़ों जितना ज्ञान है। लेकिन ज्ञान काफी नहीं है, उसे व्यक्त करने का साहस भी होना चाहिए।