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पत्नी के खर्च से परेशान होकर किया यह समझदारी वाला काम
जेन कथा
Updated Wed, 26 Nov 2014 03:45 PM IST
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मोकुसेन हिकी तम्बा के एक प्रदेश में एक मंदिर में रहते थे। वहां और लोग भी रहते थे। मोकुसेन वहां रहने वाले लोगों की निजी जिंदगी में भी रुचि लेते। रोजमर्रा के कामों में आने वाली दिक्कतों को सुलझाने में वह लोगों की मदद करते। उनकी समस्याओं का समाधान देने के कोशिश करते।
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एक दिन एक साथी मोकुसेन के पास आया और घरेलू समस्याओं के बारे में बताने लगा। उसे लगता था कि ज्यादातर समस्याएं उसकी पत्नी के लोभी स्वाभाव की वजह से हैं। उसने पत्नी की शिकायत मोकुसेन से की। मोकुसेन ने गौर से उसकी बातें सुनीं और तय किया कि वह अपने सहयोगी की पत्नी को समझाएंगे।
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अगले ही दिन उन्होंने उसकी पत्नी से मुलाकात की। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने हाथ की मुट्ठी बांधी और उस औरत के चेहरे के पास ले गए। वहां ले जाकर उन्होंने मुट्ठी को रोक दिया और पूछा, अगर मेरी मुट्ठी ऐसी होती, तो तुम इससे क्या समझती?
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उस औरत ने कहा, यह एक किस्म की विकलांगता होगी।
मोकुसेन ने मुट्ठी खोल दी। कुछ देर चुप रहे और फिर उन्होंने अपना हाथ पूरा खोल कर उसके चेहरे के पास लहराया। फिर वहीं स्थिर रखते हुए एक बार फिर पूछा, अगर यह ऐसा होता, तब तुम क्या कहती?
उस औरत ने कहा, यह भी दूसरी तरह की विकलांगता ही है। मोकुसेन यह जवाब सुनकर काफी खुश हुए और प्रसन्नता में ताली बजाने लगे। खुशी जता चुकने के बाद वह बोले, अगर तुम इतना समझ सकती हो, तो मुझे लगता है कि तुम एक अच्छी पत्नी हो। मोकुसेन इतना कहकर वहां से चले गए। उसके बाद से साथी की पत्नी ने अपने पति के साथ घर की आमदनी बांटने और बचाने में बराबर सहयोग किया।