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जूतों के फीते बांधने में मदद
-मां प्रेम समर्पण
Updated Wed, 07 Jan 2015 08:10 PM IST
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जेन गुरु रयोकान को उनकी बहन ने कोई जरूरी बात कहने के लिए अपने घर आने का बुलावा भेजा। वहां पहुंचने पर बहन ने उनसे कहा, अपने भांजे को कुछ समझाइए। वह कोई काम नहीं करता। पिता के धन को वह मौज-मस्ती में उड़ा देगा। आप ही उसे राह पर ला सकते हैं।
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रयोकान अपने भांजे से मिले। वह भी अपने मामा से मिलकर बहुत प्रसन्न था। रयोकान के जेन मार्ग अपनाने से पहले दोनों ने बहुत समय एक साथ गुजारा था। भांजा यह समझ गया था कि रयोकान उसके पास क्यों आए हैं। उसे यह आशंका सता रही थी कि रयोकान उसकी आदतों के कारण उसे अच्छी डांट पिलाएंगे। लेकिन रयोकान ने उसे कुछ भी न कहा।
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अगली सुबह जब रयोकान के वापस जाने का समय हो गया, तब वह अपने भांजे से बोले, क्या तुम मेरे जूते के फीते बांधने में मेरी मदद करोगे? मुझसे अब झुका नहीं जाता और मेरे हाथ भी कांपने लगे हैं। भांजे ने बहुत खुशी-खुशी रयोकान के जूते के फीते बांध दिए। शुक्रिया, रयोकान ने कहा। कुछ क्षण ठहरकर उन्होंने आगे कहा, दिन-प्रतिदिन आदमी बूढ़ा और कमजोर होता जाता है। तुम्हें याद है कि मैं भी कभी काफी बलशाली और कठोर हुआ करता था! भांजे ने 'हां' कहते हुए अपना सिर झटक दिया, फिर कुछ सोचते हुए उसने कहा, पर अब आप बहुत बदल गए हैं।
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भांजे के भीतर कुछ जाग रहा था। उसे अनायास यह लगने लगा कि उसके रिश्तेदार, उसकी मां और उसके सभी शुभचिंतक अब बुजुर्ग हो गए हैं। उन सभी ने उसकी बहुत देखभाल की थी और अब उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी उसकी थी। उस दिन से उसने सारी बुरी आदतें छोड़ दीं और सबके साथ-साथ अपने भले के लिए काम करने लगा।