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गुड फ्राइडे आजः जानिए ईसा मसीह की कही यह खास बात
जिम बायरन
Updated Fri, 03 Apr 2015 09:10 AM IST
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अम्ब्रिया (इटली) के एक गांव में अमीन नाम का एक आदमी रहता था। वह हमेशा अपने दुखों का रोना रोता रहता। वह ईसाई था और अच्छी बात यह थी कि वह बाइबिल का नियमित अध्ययन करता था। वह उसमें दिए गए आश्वासनों के बजाय ईसा की उस अंतिम यात्रा के विषय में सोचता, जिसमें वह अपना सलीब ढोते हैं। अमीन अपने दुखों को याद करता और सोचता कि उसके कंधे पर भी एक सलीब है, जिसे ढोने के लिए वह अभिशप्त है।
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एक रात वह इस एहसास से बहुत परेशान हो गया। उसने प्रार्थना की, हे प्रभु, मेरे दुखों का भार कुछ कम कर दो! वरना मैं खुदकुशी कर लूंगा। रात में उसने देखा कि ईश्वर उसे एक भंडार में ले गए हैं। वहां प्रभु ने कई सलीब दिखाए और कहा, जो भी दुनिया में जाता है, उसे अपना सलीब खुद ढोना पड़ता है। तुम खुद ही अपनी पसंद का सलीब चुन लो।
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उसने एक-एक कर कई सलीब देखे। हर सलीब पर उनके मालिकों का नाम लिखा हुआ था। वह समझ नहीं पा रहा था कि उसका सलीब कौन-सा है? उसने दरम्याने आकार का एक सलीब उठाया। उस पर उसके उस मित्र का नाम था, जिसे वह बहुत दुखी समझता था। उसके बारे में अमीन का ख्याल था कि अगर वह उसके हाल में रहता, तो काफी पहले मर गया होता।
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इसके बाद उसने और भी कई सलीब देखे। उसे कोई भी पसंद नहीं आया। उसे असमंजस में पड़ा देख ईश्वर ने कहा, तुम चाहो, तो सबसे छोटा सलीब चुन सकते हो। अमीन ने फिर सलीब तलाशना शुरू किया। आखिर में उसे एक सलीब मिल ही गया, जो सबसे छोटा था। अमीन यह देखकर हैरत में पड़ गया कि जिस सलीब को उसने उठाया है, उस पर उसी का नाम लिखा हुआ है।