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जब बेटे की चाहत में अमेरिकी महिला पहुंची स्वामी रामतीर्थ के पास
-सरदार पूर्णसिंह
Updated Thu, 27 Aug 2015 04:09 PM IST
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स्वामी रामतीर्थ उस वक्त अमेरिका की यात्रा पर थे। लंकाशायर में वेदांत पर व्याख्यान देने के बाद उनका लोगों से मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। स्वामी जी अपनी सपाट शैली में सवालों का जवाब देते रहे। इस क्रम में कभी कोई व्यक्ति अपने कष्टों के बारे में पूछता और परामर्श मांगता, तो स्वामी जी उसकी समस्या का भी समाधान सुझाते।
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तभी एक अमेरिकी महिला जैकलीन उनके पास आई और विलाप करने लगी। वह अपने दुख में इतनी विह्वल थी कि कुछ कह नहीं पा रही थी। बहुत सांत्वना देने के बाद वह कुछ कहने लायक स्थिति में आई और बोली, स्वामी जी, मेरे एकमात्र पुत्र की मृत्यु हो गई है। मैं बड़ी दुखी रहती हूं। कृपया मुझे दुख दूर करने का कोई उपाय बताइए।
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स्वामी जी ने कुछ पल विचार किया और फिर उसे दूसरे दिन आने की बात कही। जैकलीन दूसरे दिन आई। प्रवचन पूरा होने के बाद प्रश्नोत्तर सत्र शुरू होने के पहले ही वह स्वामी जी के सामने पहुंच गई। रामतीर्थ ने जैकलीन को देखते ही पहचान लिया।
वह कुछ बोलें, इससे पहले ही जैकलीन ने कहा, स्वामी जी, अब बताइए, क्या उपाय सोचा है? स्वामी जी ने एक अनाथ बालक का हाथ जैकलीन को पकड़ाते हुए कहा, आप इसे अपने पुत्र की भांति पालें।
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स्त्री को इसकी तनिक भी आशा न थी। वह चौंकते हुए बोली, मगर यह तो मुश्किल है कि मैं इसे अपने पुत्र की भांति मानूं। मुझे अपना पुत्र चाहिए, जिसने मेरी कोख से जन्म लिया था। स्वामी जी ने उत्तर दिया, तो फिर आपके लिए दुख दूर करना और आनंद पाना संभव नहीं है। जो अपनी आत्मीयता का विस्तार कर लेता है, दूसरों में अपना रूप देख सकता है, उन्हें अपना बना सकता है, असल में, वही आनंद पा सकता है।