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तब गांधी जी ने बताया उस महिला को रात भर नहीं सो पाने का कारण
शिवकुमार गोयल
Updated Mon, 21 Apr 2014 11:25 AM IST
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मोहनदास करमचंद गांधी की पुरानी सेविका रंभा थी। वह पढ़ी-लिखी नहीं थी, किंतु इतनी धार्मिक थी कि रामायण को हाथ जोड़कर और तुलसी को सिर नवाकर ही अन्न-जल ग्रहण करती थी।
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एक रात बालक गांधी को सोने से पहले डर लगा। उसे लगा कि कोई भूत उसके सामने खड़ा है। डर से उन्हें रात भर नींद नहीं आई। सवेरे रंभा ने लाल-लाल आंखें देखीं, तो उन्होंने गांधी से इसके बारे में पूछा। गांधी ने पूरी बात सच-सच बता दी। रंभा बोली, मेरे पास भय भगाने की अचूक दवा है। जब भी डर लगे, तो राम नाम जप लिया करो।
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गांधी जी ने यह नुस्खा अपनाया, तो उन्हें लगा कि इसमें बहुत ताकत है। बाद में संत लाधा महाराज के मुख से रामकथा सुनकर राम नाम में उनकी आस्था और सुदृढ़ हो गई। बड़े होने पर गांधी जी ने अनेक ग्रंथों का अध्ययन किया, तो वह समझ गए कि भय से पूरी तरह मुक्ति भी ठीक नहीं होती।
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एक बार वर्धा में एक व्यक्ति उनसे मिलने आया। गांधी जी से उसने पूछा, बापू! पूरी तरह भयमुक्त होने के उपाय बताएं। गांधी जी ने कहा, मैं स्वयं सर्वथा भयमुक्त नहीं हूं। काम और क्रोध ऐसे शत्रु हैं, जिनसे भय के कारण ही बचा जा सकता है। इन्हें जीत लेने से बाहरी भय का उपद्रव अपने-आप मिट जाता है। राग-आसक्ति दूर हो, तो निर्भयता सहज प्राप्त हो जाए। उस व्यक्ति को अपने सवाल का जवाब मिल गया था।