{"_id":"af4cca041fd6f9277c6ff1e13c4c6fab","slug":"finally-victory-of-life-on-death-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"लड़के की मौत नजदीक है जानते हुए भी लड़की ने क्यों किया विवाह","category":{"title":"Metaphysical","title_hn":"परामनोविज्ञान","slug":"metaphysical-parasychology"}}
लड़के की मौत नजदीक है जानते हुए भी लड़की ने क्यों किया विवाह
-श्रीअरविंद के महाकाव्य सावित्री की पीठिका
Updated Mon, 18 May 2015 05:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महाभारत के वन पर्व में आए उल्लेख के अनुसार सावित्री राजर्षि अश्वपति की कन्या थी। वर की खोज करते हुए उसने सत्यवान को पति रूप में स्वीकार कर लिया। देवर्षि नारद ने कहा कि सत्यवान की आयु एक वर्ष ही शेष है। तुम अपना निर्णय बदल सकती हो।
विज्ञापन
सावित्री ने कहा कि जो कुछ होना था, वह हो चुका। निर्णय किए जाते हैं, कार्यान्वित करने के लिए। माता-पिता ने भी बहुत समझाया, परंतु सावित्री अपने संकल्प से डिगी नहीं।
विज्ञापन
पढ़ें, साप्ताहिक राशिफलः इस हफ्ते किन राशि वालों के भाग्य के सितारे चमकने वाले हैं
सावित्री जगत को आलोकित करने वाले सविता देवता की पुत्री थी। सविता की पुत्री अर्थात चेतना का उच्चतम स्तर, जहां पीछे लौटना संभव नहीं होता। सत्यवान से सावित्री का विवाह हो गया। और वह राजमहल छोड़कर सत्यवान के पास जंगल की कुटिया में आ गई।
विज्ञापन
पढ़ें,मजेदार और कुछ खास बातें जानिए अपने जन्म के महीने से
सत्यवान की मृत्यु का दिन निकट आ पहुंचा। जंगल में लकड़ियां काटने जा रहे सत्यवान के लिए वह महाप्रयाण का दिन था। सावित्री चिंतित थी। वह भी साथ हो गई। लकड़ियां काट कर पेड़ से नीचे उतरते ही सत्यवान की मृत्यु हो गई। थोड़ी देर में सावित्री ने देखा कि एक देवपुरुष ने सत्यवान के प्राण को उसके शरीर से खींच लिया है।
वह देवपुरुष मृत्यु का देवता यम था। उसने बताया कि तुम्हारे सतीत्व के तेज के सामने मेरे दूत नहीं आ सके, इसलिए मैं स्वयं सत्यवान के प्राण लेने आया हूं।
सावित्री भी पीछे-पीछे चली। यम ने मना किया। सावित्री ने कहा, जहां सत्यवान हों, वहीं मुझे जाना चाहिए। यम के मना करने पर भी सावित्री चलती रही। यम ने एक-एक कर उसे कई वर दिए। पर सावित्री ने अपनी निष्ठा और तेज से यम को वचनबद्ध कर लिया।
अंतत: यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए। इसका संदेश यह है कि निष्ठा से तेज की प्राप्ति होती है, और उस तेज से मृत्यु को भी जीता जा सकता है।