{"_id":"274776892a40951318e0e1b36473ae66","slug":"everyone-has-had-spells-success-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"ताबीज का कमाल या कुछ और गुजारी श्मशान में अकेले पूरी रात","category":{"title":"Metaphysical","title_hn":"परामनोविज्ञान","slug":"metaphysical-parasychology"}}
ताबीज का कमाल या कुछ और गुजारी श्मशान में अकेले पूरी रात
श्रीकांत शर्मा
Updated Tue, 13 Oct 2015 04:02 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मगध के एक गांव में विशाखदत्त नाम का एक युवक रहता था। वह बहुत मेहनती था, पर हमेशा सशंकित रहता था कि वह अपने काम में सफल होगा या नहीं! एक दिन गांव में प्रसिद्ध संत शिवरामदास का आगमन हुआ। विशाखदत्त भी संत से मिला और उन्हें अपनी नाकामियों के बारे में बताया। संत ने कहा, तुम्हारी समस्या का हल इस ताबीज में है, इसमें कुछ मंत्र रखे हैं। इन्हें सिद्ध करने के लिए तुम्हे एक रात श्मशान में गुजारनी होगी।
विज्ञापन
पढ़ें, जिनके इन अंगों पर तिल होता है उन्हें धन का अभाव कभी नहीं रहता
विज्ञापन
श्मशान का नाम सुनते ही विशाखदत्त का चेहरा पीला पड़ गया। वह कहने लगा, लेकिन मैं रात भर अकेले कैसे रहूंगा? संत ने समझाया, घबराओ मत, यह कोई मामूली ताबीज नहीं है। यह तुम्हें हर संकट से बचाएगा। युवक को बात समझ आई और उसने पूरी रात श्मशान में बिताई। सुबह होते ही वह संत जी के पास पहुंचा और धन्यवाद देने लगा। इस घटना के बाद विशाखदत्त बदल गया। अब वह जो भी करता सफल होता, और सोचता कि ताबीज के कारण कामयाब हो रहा है।
विज्ञापन
पढ़ें,सुबह-सुबह इन 8 चीजों को देखना बड़ा ही अपशकुन माना जाता है
करीब साल भर बाद फिर संत उस गांव में आए। विशाखदत्त तुरंत उनके दर्शन के लिए गया और उनके दिए ताबीज का गुणगान करने लगा। तब संत जी बोले, बेटे! जरा अपनी ताबीज निकालकर देना। उन्होंने ताबीज हाथ में लिया और उसे खोला। उसे खोलते ही विशाखदत्त स्तब्ध रह गया। ताबीज के अंदर मंत्र-वंत्र नहीं लिखा था। वह तो एक पुर्जा मात्र था! विशाखदत्त ने कहा, यह क्या महाराज, यह तो एक मामूली ताबीज है, फिर इसने मुझे सफलता कैसे दिलाई?
संत ने कहा, तुम्हें सफलता इस ताबीज ने नहीं, बल्कि विश्वास की शक्ति ने दिलाई है। तुम इसलिए सफल नहीं हो पा रहे थे कि तुम्हें खुद पर यकीन नहीं था। लेकिन जब इस ताबीज के बहाने वह सोई शक्ति जाग गई, तो तुम सफल होते चले गए।