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जब मन में ऐसी बातें आने लगे तो समझ लीजिए आपका विनाश नजदीक है
जेन कथा
Updated Wed, 05 Aug 2015 03:11 PM IST
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तीरंदाजी की कई प्रतियोगिताएं जीतने के बाद वह नौजवान खुद को सबसे बड़ा धनुर्धर मानने लगा था। वह जहां भी जाता, लोगों को मुकाबला करने की चुनौती देता, और उन्हें हराकर उनका मजाक उड़ाता। एक बार उसने एक प्रसिद्ध जेन मास्टर को चुनौती दी। दोनों के बीच मुकाबला शुरू हुआ। युवक ने अपने पहले प्रयास में ही दूर रखे लक्ष्य के ठीक बीचों-बीच निशाना लगा दिया।
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अपनी कामयाबी पर इतराते हुए वह बोला, मास्टर, आप इससे बेहतर दिखा सकते हैं? मास्टर ने उस युवक से कहा, पुत्र, मेरे पीछे आओ। चलते-चलते दोनों एक खतरनाक खाई के पास पहुंच गए।
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युवक ने देखा कि वहां दो पहाड़ियों को जोड़ने के लिए किसी ने लकड़ी का एक कामचलाऊ पुल बनाया है, जो काफी जर्जर हो चुका है। मास्टर पुल के बीचों-बीच पहुंचे। उन्होंने कमान से तीर निकाला और दूर एक पेड़ के तने पर निशाना लगाया। उनका निशाना सही लगा।
निशाना लगाने के बाद मास्टर बोले, अब तुम भी उसी पेड़ पर निशाना लगाकर अपनी दक्षता साबित करो। युवक डरते-डरते आगे बढ़ा और बड़ी मुश्किल से पुल के बीचों-बीच पहुंचा। उसने किसी तरह निशाना लगाया, पर निशाना लक्ष्य के आस-पास भी नहीं लगा। युवक ने अपनी हार स्वीकार कर ली।
तब मास्टर बोले, तुमने तीर-धनुष पर तो नियंत्रण हासिल कर लिया है, पर उस मन पर अब भी तुम्हारा नियंत्रण नहीं है, जो किसी भी परिस्थिति में लक्ष्य भेदने के लिए आवश्यक है। यह बात हमेशा याद रखो कि जब तक मनुष्य के अंदर सीखने की जिज्ञासा है, तब तक उसके ज्ञान में वृद्धि होती है, पर जब उसे सर्वश्रेष्ठ होने का अहंकार हो जाता है, तो उसका पतन शुरू हो जाता है।