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चीलों ने किया कुछ ऐसा काम भिखारी की खुल गई किस्मत
फखरुद्दीन साहब
Updated Thu, 14 May 2015 03:36 PM IST
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एक भिखारी ने इब्राहिम इब्न अल अदम से भीख में कुछ पैसे मांगे। इब्राहिम ने उससे कहा, तुम मेरे साथ चलो। मैं तुम्हारे खाने-पीने का पुख्ता इंतजाम कर देता हूं। भिखारी राजी हो गया। इब्राहिम उसे लेकर एक दुकानदार के पास गए और उससे भिखारी को कोई छोटा-मोटा काम देने के लिए कहा, ताकि वह खुद अपनी रोजी-रोटी कमा सके। दुकानदार ने इब्राहिम का मान रखते हुए भिखारी को काम पर रख लिया। उसने उसे नगर में जाकर सामग्री बेचने का काम सौंपा।
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भिखारी को वह काम रास नहीं आया और वह नौकरी छोड़ कर वापस उसी जगह आकर भीख मांगने लगा। कुछ दिन बाद इब्राहिम उधर से निकले, तो उन्हें भिखारी को पहले की तरह सड़क पर भीख मांगते देख आश्चर्य हुआ। पूछने पर भिखारी ने कहा, एक रोज सफर के दौरान मैंने रेगिस्तान में एक चील को देखा, जिसकी दोनों आंखें खराब थीं।
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मैंने यह जानने की कोशिश की कि अंधी चील अपना पेट किस तरह भरती है। कुछ समय तक उस पर नजर रखी और पाया कि एक दूसरी चील उसके लिए दाना-खाने का इंतजाम करती थी। तब मैंने खुद से यह कहा, अल्लाह ने ही उस अंधी चील की देखभाल के लिए ऐसा इंतजाम किया है और वही मेरी भी गुजर-बसर की फिक्र करेगा। तब मैं यहां लौट आया और मैंने दुकानदार को उसका सामान वापस कर दिया। अब मैं इस तरह रहने में ही प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूं।
इब्राहिम ने उसकी बात सुनकर दो पल के लिए कुछ सोचा, फिर कहा, अंधी चील के जैसा जीवन बिताने के बजाय तुमने उस चील की तरह बनने के बारे में क्यों नहीं सोचा, जो उड़ती, पीछा करती और दूसरों की परवाह करती है? भिखारी का सिर शर्म से झुक गया।