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बाल कटवाने जाएं तो नाई की इस बात को हमेशा याद रखें
विनोबा भावे
Updated Fri, 12 Dec 2014 05:56 PM IST
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मक्का की बात है। एक नाई किसी के बाल काट रहा था। वहां और भी लोग थे, जो अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। उसी समय फकीर जुन्नैद वहां आ पहुंचे। नाई ने फकीर को देखा और झुककर 'आदाब' कहा। जुन्नैद ने उसे दुआ दी। कुछ देर वह वहां रुके और फिर बोले, खुदा की खातिर मेरी भी हजामत बना दे। बाल बहुत बढ़ गए हैं।
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नाई ने खुदा का हवाला सुना, तो जिस ग्राहक की बारी थी, उसे कुछ देर और रुकने के लिए कहा। यहां तक, कि जिस ग्राहक की वह हजामत बना रहा था, उसकी भी दाढ़ी बनाना छोड़ दिया। उससे कुछ देर रुकने के लिए कहा। उस ग्राहक ने अपनी बारी का हवाला दिया, तो नाई बोला, दोस्त, अब मैं थोड़ी देर आपकी हजामत नहीं बना सकूंगा। आपको थोड़ा रुकना पड़ेगा। खुदा की खातिर उस फकीर की खिदमत मुझे पहले करनी चाहिए। खुदा का काम सबसे पहले है।
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इसके बाद उसने फकीर की हजामत बड़े प्रेम और श्रद्धा-भक्ति से बनाई और झुककर अभिवादन करके उसे विदा कर दिया। फकीर के जाने के बाद उसने पहले वाले ग्राहक की बाकी हजामत बनाई, और फिर दूसरे लोगों की सेवा करने लगा।
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कुछ दिन बीत गए। एक रोज फकीर जुन्नैद को किसी ने कुछ पैसे भेंट किए। उन पैसों को लेकर वह नाई के पास पहुंचे, और उसे देने लगे। नाई ने पैसे लेने से इन्कार कर दिया। जुन्नैद पैसे लेने की जिद करने लगे। इस पर नाई ने कुछ तल्ख होकर कहा, आपको शर्म नहीं आती? आपने तो खुदा की खातिर हजामत बनाने को कहा था, पैसों की खातिर नहीं।
फिर तो जीवन-भर फकीर जुन्नैद को वह बात याद रही। वह अपनी मंडली में कहा करते थे, निष्काम ईश्वर-भक्ति मैंने नाई से सीखी है।