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कमाल है, आत्मा का रहस्य जानने के लिए घर परिवार त्याग दिया
शिवकुमार गोयल
Updated Tue, 22 Apr 2014 09:07 AM IST
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स्वामी दयानंद सरस्वती ने युवावस्था में बद्रीनाथ-केदारनाथ के पर्वतीय क्षेत्रों का भ्रमण किया था। उस यात्रा में एक दिन वह टिहरी पहुंचे। उनके तेजस्वी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर वहां के एक प्रतिष्ठित विद्वान ने उन्हें अपने घर भोजन के लिए निमंत्रित किया। वह उसके घर पहुंचे, तो देखा कि एक व्यक्ति बकरे का मांस काट रहा है। वह वापस लौटने लगे, तो गृहस्वामी ने रुकने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, मैं मांसाहारी के घर भोजन नहीं कर सकता। यह कहकर वह वापस लौट आए।
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गुप्तकाशी में वह ओखी मठ में ठहरे। मठ का महंत उनसे बातचीत कर समझ गया कि यह तेजस्वी युवक विद्वान है। उसने एक दिन स्वामी जी से कहा, तुम हमारे शिष्य बन जाओ। हमारे इस मठ के पास अपार भूमि और धन-संपदा है। आगे चलकर तुम इसके स्वामी बन जाओगे।
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स्वामी जी ने कहा, यदि मुझे किसी मठ या संपत्ति का मालिक बनने की लालसा होती, तो मैं माता-पिता, बंधु-बांधव और घर आदि क्यों छोड़ता। महंत ने पूछा, तो फिर क्या पाने के लिए घर छोड़ा है? स्वामी जी ने कहा, सत्य, विद्या, योग, मुक्ति, आत्मा आदि का रहस्य जानने के लिए मैंने घर छोड़ा है।
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अगले दिन सुबह स्वामी जी चुपचाप उठे और जोशीमठ जा पहुंचे। उन्होंने अपनी उस यात्रा में अनेक पाखंडी तांत्रिकों और निरीह पशु-पक्षियों की बलि देने वालों का डटकर विरोध किया।