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ऐसे लोगों को कभी नहीं मिलते हैं भगवान
ओशो
Updated Fri, 30 May 2014 08:41 AM IST
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आचार्य रामानुज के पास एक युवक आया और उनसे निवेदन किया, महाराज, मैं परमात्मा को पाना चाहता हूं। मेरा मार्गदर्शन करें।
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इस पर आचार्य ने कहा, बेटा, पहले यह बताओ कि तुमने कभी किसी से प्रेम किया है? सवाल सुनते ही युवक ने कहा, महाराज, मैंने आज तक किसी की तरफ आंख उठाकर देखा तक नहीं। मेरे संस्कार बचपन से धार्मिक हैं।
आचार्य रामानुज ने फिर पूछा, सोचकर बताओ, कभी किसी से प्रेम किया हो, किसी को चाहा हो? युवक ने फिर कहा, नहीं महाराज, मैंने परमात्मा के सिवा किसी को नहीं चाहा। आचार्य ने तीसरी बार पूछा। युवक समझ रहा था कि आचार्य को उसकी बात पर भरोसा नहीं हो रहा।
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शायद वह समझ रहे हैं कि मैं दुनिया में किसी न किसी के मोहजाल में जरूर पड़ा हूं। उसने अपने हर संबंध को याद किया, लेकिन उसे ऐसा कोई पल याद नहीं आया, जब वह किसी की प्रति आकर्षित हुआ हो। उसने फिर दृढ़ता से इन्कार कर दिया।
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आचार्य रामानुज निराश होकर बोले, तब मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता। जिसने कभी संसार में किसी से प्रेम नहीं किया, वह भला परमात्मा से कैसे प्रेम कर सकेगा? तुम्हारे भीतर यदि प्रेम की चिंगारी मौजूद होती, तो मैं उसे आग में बदल सकता था।
जीवन तो प्रेम के बिना चल ही नहीं सकता। और तुम्हें यदि उसका भान नहीं है, तो परमात्मा जैसी अमूर्त सत्ता के लिए तो उसके बिना मार्ग और भी कठिन है।