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उस कुएं का पानी पीने वाला पागल हो जाएगा
भिक्षु धर्मरक्षित
Updated Wed, 07 May 2014 12:39 PM IST
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एक साधु गांववालों की किसी बात से नाराज हो उठा। उसे शायद कुएं से पानी नहीं लेने दिया गया था। उसने शाप दिया कि अगली सुबह के बाद जो भी कुएं का पानी पीएगा, वह पागल हो जाएगा। सिर्फ एक आदमी ने इस चेतावनी पर ध्यान दिया और उसने जितना हो सकता था, उतना जल इकठ्ठा करके एक गुप्त स्थान पर रख दिया।
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अगले दिन कुएं का पानी बदल गया। लोगों ने पानी पिया और उलटी-सीधी हरकतें करने लगे। जिस आदमी ने पानी बचाकर रख लिया था, उसे कोई समस्या नहीं हुई। उसने छककर पानी पिया। फिर वह दूसरे लोगों के बीच गया। उसने पाया कि बदल चुका पानी पीने के बाद सभी लोग पहले से विपरीत सोचने और बोलने लगे हैं।
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उन्हें अतीत के बारे में कुछ भी याद नहीं था। उन्हें न तो साधु की चेतावनी के बारे में मालूम था और न ही वे पानी के बदलने की बात जानते थे। उस आदमी ने उन लोगों से बात करने की कोशिश की, तो सबने उसे पागल समझकर दुत्कार दिया।
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उनके साथ रहते हुए वह आदमी छिपाया हुआ अपना जल पीने के लिए सुरक्षित स्थान पर प्रतिदिन जाता रहा। एक दिन वह पानी नहीं पी सका। लोगों ने उसे प्यासा देखकर नया जल पिला दिया। नया जल पीते ही वह भी दूसरों जैसा हो गया। बचाकर रखे जल के बारे में वह भूल गया और दूसरों की तरह हरकतें करने लगा। उधर सभी लोग मानने लगे कि उसका पागलपन ठीक हो गया है।