Vishwakarma Puja 2018: भगवान विश्वकर्मा ने बनाई थी सोने की लंका और स्वर्ग लोक
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17 सितंबर 2018 को विश्वकर्मा जयंती है। इस दिन देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को देव शिल्पी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है सभी पौराणिक रचनाओं का निर्माण स्वयं इन्हींने किया था। देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा का जन्म देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से माना जाता है। भगवान विश्वकर्मा ने समस्त अस्त्र, शस्त्र और भवन का निर्माण किया था। भगवान विश्वकर्मा ने सोने की लंका, पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज, भगवान शिव का त्रिशूल, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगर और भगवान कृष्ण की नगरी द्वारिका को बनाया था।
कहा जाता है कि सभी पौराणिक संरचनाएं, भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित हैं। भगवान विश्वकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से माना जाता है। पौराणिक युग के अस्त्र और शस्त्र, भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही निर्मित हैं। वज्र का निर्माण भी उन्होंने ही किया था। माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही लंका का निर्माण किया था।
भगवान शिव ने माता पार्वती के लिए एक महल का निर्माण करने के बारे में विचार किया। इसकी जिम्मेदारी शिवजी ने भगवान विश्वकर्मा दी तब भगवान विश्वकर्मा ने सोने के महल को बना दिया। इस महल की पूजा करने के लिए भगवान शिव ने रावण का बुलाया। लेकिन रावण महल को देखकर इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि उसने पूजा के बाद दक्षिणा के रूप में महल ही मांग लिया। भगवान शिव ने महल को रावण को सौंपकर कैलाश पर्वत चले गए।इसके अलावा भगवान विश्वकर्मा ने पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगर का निर्माण भी किया था। कौरव वंश के हस्तिनापुर और भगवान कृष्ण के द्वारका का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था।
भगवान विश्वकर्मा में किसी बेजान वस्तु में जान डालना की अद्भुत कला थी । वर्तमान समय में इस कला को इंजीनियर का दर्जा दिया जाता हैं । पूर्व और उत्तर भारत में विश्वकर्मा पूजन हर साल 17 सितम्बर को मनाया जाता है । इस दिन सभी कार्यस्थलों, फैक्टरियों, कम्पनियों आदि में मशीनों, औजारों आदि की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा, एक देवता थे जिन्होने ब्रह्माण्ड को बनाया। वह भगवान ब्रह्म्देव के पुत्र थे और ईश्वर के रहने वाले सभी धार्मिक स्थानों का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। ईश्वर के उड़ने वाले विमानों का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था, ईश्वरों के सभी शस्त्रों को भी विश्वकर्मा देवता ने बनाया था। भगवान विश्वकर्मा आज के युग की भाषा में इंजीनियर थे।
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस समस्त ब्रह्मांड की रचना भी विश्वकर्मा जी के हाथों से हुई है। ऋग्वेद के 10वे अध्याय के 121वे सूक्त में लिखा है कि विश्वकर्मा जी के द्वारा ही धरती, आकाश और जल की रचना की गई है।। विश्वकर्मा पुराण के अनुसार आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्मा जी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की।